खेती के अलावा गोल गप्पे की ठेली लगाकर कमा रहे 500 से 600 रूपये प्रतिदिन

खेती के अलावा गोल गप्पे की ठेली लगाकर कमा रहे 500 से 600 रूपये प्रतिदिनखेती-किसानी के काम के साथ-साथ आय बढ़ाने के लिए श्याम बाबू गोल-गप्पे बेच रहे हैं।

इश्त्याक खान, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

औरैया। खेती-किसानी के काम के साथ-साथ आय बढ़ाने के लिए श्याम बाबू गोल-गप्पे बेच रहे हैं। दरअसल श्याम बाबू उच्च शिक्षा न प्राप्त कर पाने के कारण गाँव में ही खेती कर रहे हैं। यह काम खेती-किसानी के बीच बाधा इसलिए नहीं बना, क्योंकि वह हथठेली से नहीं बल्कि (जुगाड़गाड़ी) बाइक में ठेली लगाकर गाँव-गाँव गोल-गप्पे बेचकर 500 से लेकर 600 रुपए प्रतिदिन कमा रहे हैं।

जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर की दूरी पर पूरब दिशा में बसे गाँव मिर्जापुर बैरमशाह के श्याम बाबू (19 वर्ष) बताते हैं, “आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाया। पिता ने खेती-किसानी के काम में बचपन से लगा दिया। गाँव के ही स्कूल में मिडल तक शिक्षा पाई। खेती से होने वाली आय से सिर्फ घर का ही खर्च चल पाता था। इसके लिए अन्य खर्चे के लिए मजदूरी करनी पड़ती थी, जिसमें अधिक मेहनत करनी होती थी। इसलिए मैंने मजदूरी न कर स्वयं काम करने का विचार बनाया। स्वयं का काम तब कर पाता जब पैसा पास होता है इसलिए कोई बड़ा धंधा नहीं कर पाया।

गाँव से जुड़ी सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

तीन साल में 38 हजार रुपए इकट्ठा कर गोल-गप्पे का काम करने की जुगत बनाई। इसके लिए 20 हजार रुपए की बजाज की बॉक्सर बाइक खरीद कर 18 हजार रुपए की ठेली के साथ काउंटर और बर्तन खरीदे।” वह आगे बताते हैं, “मैंने गाँव-गाँव जाकर गोल-गप्पे बेचता हूं। किसानी के समय किसानी का काम भी कर लेता हूं। एक दिन में चार से पांच गाँव में बेंच कर 500 से 600 रुपए कमा लेता हूं, खर्चा छोड़ के। खेत पर काम करने के बाद जब तक वापस लौटता हूं तब तक माता जी गोल-गप्पे का पानी और काउंटर लगा देती हैं। इससे मेरा खेती का नुकसान भी नहीं होता है और डबल आय भी हो जाती है।

काम कोई छोटा-बड़ा नहीं होता है बस उसे करने में सिर्फ लगन होनी चाहिए। गोल-गप्पे के धंधे में नुकसान नहीं होता है अन्य धंधे में नुकसान की संभावना रहती है। मैं अपने इस काम को सबसे बड़ा और सबसे अच्छा काम समझकर करता हूं।
श्याम बाबू, गोल-गप्पे का काम करने वाले

कम समय में अधिक आय

श्याम बाबू बताते हैं, “हथठेली से गोल-गप्पे बेचने पर खेती-किसान के काम में व्यवधान होगा और एक गाँव के अलावा दूसरे गाँव जा भी नहीं पाएंगे। बाइक ठेली से शाम के समय चार से पांच गाँव में बिक्री भी कर लेते हैं और किसानी का काम भी। इसलिए कम समय में अधिक आय भी हो जाती है और घर का काम भी।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top