होली आते ही मिलावटखोर सक्रिय

होली आते ही मिलावटखोर सक्रियहोली का त्योहार निकट आते ही दूध और खोये में मिलावट तेज हो गई है।

राजीव शुक्ला, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कानपुर। होली का त्योहार निकट आते ही दूध और खोये में मिलावट तेज हो गई है। इस साल भी नकली खोया व्यवसायियों के हौसले बुलंद हैं और जिले के अधिकांश गाँवों में नकली खोया तैयार करके मंडियों में भेजा जाने लगा है।

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नाम न छापने की शर्त पर कानपुर की गोविन्द नगर नन्दलाल चौराहा स्थित खोया मंडी के एक खोया व्यवसायी ने बताया कि नकली खोया तैयार करने में खर्चा कम आता है और उसकी कीमत अधिक मिलती है। इससे उन्हें काफी मुनाफा होता है। उसने बताया कि इस कारोबार को होली दीवाली और सहालग में अधिक किया जाता है। क्योंकि इसमें बाजार में मावा की मांग अधिक रहती है। दूध के उत्पादन और आपूर्ति के बीच भारी अंतर होता है, जिसके कारण मिलावट खोरों का धंधा निकल पड़ता है। अब तो बाजार में सिंथेटिक दूध भी उपलब्ध है और इन्हीं से खोवा, छेना और पनीर तैयार किया जा रहा है

मिलावटी खोये से बनी चीजों को खाने से व्यक्ति को उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसके अलावा यह सीधा असर लीवर और फेफड़ों पर डालता है और यदि कहीं गलती से नकली खोया का सेवन चार से छह बार कर लिया जाए तो गुर्दा भी फेल हो सकता है। यहां तक कि नकली खोये से कैंसर जैसी घातक बीमारी होने का भी खतरा रहता है।
डॉ. पियूष मिश्रा, मेडिकल गैस्ट्रोइन्ट्रोलोजी , कानपुर

पिछले साल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मिलावट खोरों के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश दिया था। उस समय अधिकारियों ने बड़ी मात्रा मिलावटी दूध, खोया और मिठाई पकड़ी थी। खोया विक्रेता अनुराग यादव (42 वर्ष) बताते हैं, “हर साल कानपुर जिले से अन्य जिलों में भी मावा भेजा जाता है क्योंकि होली पर दुकानदार सामान्य दिनों की अपेक्षा दोगुने से तीन गुना तक मावा की खपत होती है और आर्डर मिलता है। यही दिन कमाने के होते हैं और थोड़ी बहुत मिलावट तो हर धंधे में चलती है।” खोये के दुकानदारों के अनुसार 8 मार्च से 11 मार्च तक मावा की बिक्री ज्यादा होगी।

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