तापमान बढ़ने के बाद गेहूं की फसल में लग सकता है रोग, किसान ये करें उपाय

Divendra SinghDivendra Singh   10 Feb 2017 5:53 PM GMT

तापमान बढ़ने के बाद गेहूं की फसल में लग सकता है रोग, किसान ये करें उपायमौसम के हिसाब से किसान कृषि प्रबन्धन के लिए ये उपाय अपना सकते हैं।

लखनऊ। फरवरी में तापमान बढ़ने के बाद रबी की फसलों में कई तरह के बदलाव आते हैं। प्रदेश के कई कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने बैठक में मौसम आधारित राज्य स्तरीय कृषि परामर्श समूह की पहली बैठक में बताया कि किसान कैसे इस हफ्ते फसलों की सुरक्षा कर सकते हैं। प्रदेश में मौसम के हिसाब से किसान अगले सप्ताह कृषि प्रबन्धन के लिए ये उपाय अपना सकते हैं।

गेहूं में कल्ले निकलने व गांठ बनने की अवस्था संवेदनशील है, इसलिए इन अवस्थाओं में सिंचाई जरूर करें। दोमट भूमि में देरी से बुआई वाले क्षेत्रों में नत्रजन की एक चौथाई मात्रा सिंचाई के बाद ओट आने पर दें। हल्की मृदा (बलुई दोमट) में नाईट्रोजन की शेष मात्रा का आधा भाग दूसरी सिंचाई के बाद ओट आने पर दें।

गेहूं में जिंक की कमी के लक्षण दिखाई देने पर पांच किग्रा जिंक सल्फेट और 16 किग्रा यूरिया को 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़कें। यूरिया की टॉप ड्रेसिंग कर दी है तो यूरिया के स्थान पर 2.5 किग्रा बुझे हुए चूने के पानी (2.5 किग्रा बुझे चूने को 10 लीटर पानी में सायंकाल भिगोकर दूसरे दिन पानी निथार कर) का प्रयोग करें।

तिलहनी फसलों की खेती

यदि नाशीजीवों (कीट) की संख्या उनके प्राकृतिक शत्रुओं से दोगुनी हो तभी रसायनों का प्रयोग करें। विलम्ब से बोई गई फसलों में वर्तमान मौसम में माहू की सम्भावना बनती है। माहू, चित्रित बग एवं पत्ती सुरंगक कीट के नियन्त्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 125 मिली./हे. अथवा डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ई.सी. अथवा मिथाइल-ओ-डेमेटान 25 प्रतिशत ई.सी. 1 ली./हे. अथवा मोनोक्रोटोफास 36 प्रतिशत एस.एल. की 500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

दलहनी फसलों की खेती

चना, मटर व मसूर में फली छेदक एवं सेमी लूपर कीटों की रोकथाम के लिए एनपीबी विषाणु से ग्रसित 250 सूड़ियों का रस 200 से 300 लीटर पानी में मिलाकर 0.5 प्रतिशत गुड़ के साथ छिड़काव करना चाहिए। फूल आने पर यदि प्रकोप दिखाई दे तो वेसिलस थूरिजजिएन्सिस (बीटी) की कार्स्टकी प्रजाति 1.0 किग्रा अथवा एजाडिरैक्टिन 0.03 प्रतिशत डब्लूएसपी 2.5-3.0 किग्रा अथवा मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी की 2.0 लीटर मात्रा का 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

ऐसे करें गेहूं में लगे रोग से बचाव

  • सिंचित व असिंचित दोनों प्रकार के गेहूं में रोग वाली बाली दिखाई देने पर उसे पाॅलीथिन में डालकर काट लें और उसे जमीन में गाड़ दें। गेहूं की बोई गई प्रजाति की शुद्धता बनाये रखने के लिए रोगिंग (अवांछित पौधों को निकाल दें) करें।
  • खड़ी फसल में दीमक का प्रकोप होने पर सिंचाई के पानी के साथ क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।
  • गेहूं और जौ की फसल में माहू का प्रकोप होने पर मिथाइल ओ डिमेथान 25 ईसी अथवा डायमीथोएट 30 ई.सी. की एक लीटर मात्रा अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 125 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से 600-750 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

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