गाँव के बच्चों को शिक्षित करने का लक्ष्य

Deepanshu MishraDeepanshu Mishra   4 March 2017 9:27 AM GMT

गाँव के बच्चों को शिक्षित करने का लक्ष्यगाँव के प्रधान ने बच्चों की शिक्षित करने के गाँव में दो स्कूल खुलवाये।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

बाराबंकी। जबसे मैं प्रधान बना हूं तब से चाहता हूं कि गाँव के सभी बच्चे शिक्षित हों। मैंने भी पढ़ाई की है तो शिक्षा कितनी जरूरी है जानता हूं। ऐसा बताया बाराबंकी जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूरी पर ग्राम पंचायत सिपहियापुर के ग्राम प्रधान संदीप सिंह (35 वर्ष) ने।

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वह आगे बताते हैं, “मेरे घर के ही लोग 35 वर्ष से प्रधान हैं बीच में केवल एक बार पांच वर्ष के लिए प्रधानी चली गयी थी, उसके बाद पिता जी से मैंने बोला अब मैं प्रधानी लड़ूंगा, जिससे मैं अच्छे काम करवा सकूं। गाँव के लोग इसी वजह से वोट देते हैं क्योंकि हमने काम करवाया है।

प्रधान ने बताया, “मैं चाहता हूं कि गाँव में कुछ अलग काम भी हो जो गाँव वालों के लिए उपयोगी हो। ग्राम पंचायत को आगे न बढ़ा पाने की वजह से धरना भी दिया, लेकिन किसी ने नहीं सुना। कोई भी सरकार नाली-खडंजा के अलावा कोई काम नहीं कराती।

मनरेगा का पैसा ही समय पर नहीं आता है जो आगे का काम करवा पाऊं। ग्रामीण जब पूछते हैं तो यही बताता हूं भैया पैसा आ जाये काम करवाता हूं।

मेरे घर में जब से प्रधानी आई है तब से गाँव के सभी बच्चे शिक्षित हो रहे हैं। गाँव में हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के दो स्कूल खुलवाए, जिससे बच्चे अच्छी शिक्षा पा सकें।
संदीप सिंह, ग्राम प्रधान

“प्रधान ने बहुत काम करवाया है गाँव में पक्की सड़कें, नालियां हैं। मैं तो प्रधान से बहुत खुश हूं। राशन भी समय पर मिल जाता है।’’ कपड़ा सिलते हुए सिपहियापुर गाँव के रामू (45 वर्ष) ने बताया। रामू ने आगे बताया, “मनरेगा का काम पहले कुछ दिन हुआ था, उसके बाद काफी दिनों से पैसा ही नहीं आया है जो आगे का काम हो। हम जब पूछते हैं तो प्रधान बताते हैं पैसा आ जाएगा तो काम शुरू करवा दूंगा।”

“बहुत अच्छे प्रधान हैं सबकी सुनते हैं, सबका काम करवाते हैं। मुझे और मेरे परिवार को कोई भी दिक्कत नहीं है। कोटा भी समय पर मिलता है, गाँव में सफाई भी रहती है बिजली भी अब और क्या चाहिए। ऐसा कहना था शबाना (35 वर्ष) का।

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