आजकल के मौसम में अपने पशुओं के साथ ऐसा बिलकुल न करें वरना घट सकता है दूध का उत्पादन

Diti BajpaiDiti Bajpai   22 May 2017 5:12 PM GMT

आजकल के मौसम में अपने पशुओं के साथ ऐसा बिलकुल न करें वरना घट सकता है दूध का उत्पादनज्यादातर पशुपालक जानकारी के अभाव में पशुओं को दोपहर में ही नहला देते है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। पशुओं को गर्मियों से निजात दिलाने के लिए ज्यादातर पशुपालक जानकारी के अभाव में पशुओं को दोपहर में ही नहला देते है। इससे दूध उत्पादन की क्षमता पर तो असर पड़ता है साथ ही पशुओं को बुखार की भी समस्या होती है।

उत्तर प्रदेश में इस समय तेज धूप निकलने से गर्मी में इजाफा हुआ है। मौसम विभाग ने प्रदेश में जून तक मानसून आने का अनुमान भी जताया है। यानी की मई के अंत तक गर्म लू चलने से पशुपालकों को मुश्किलें आ सकती हैं।

डॉ वी.के.सिंह बताते हैं, “ नहलाने का तो पशुपालकों को धयान रखना चाहिए साथ ही इस बात का भी ध्यान रखे कि अगर पशु को चराने के लिए ले जा रहे तो उसको सूखी चरी खिलाने से बचाएं इससे पशुओं की मौत भी हो जाती है।” गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान से पशुओं में लू लगने का खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

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कई बार पशुपालक पशु के चरने के आने के बाद उन पर पानी छिड़क देते हैं। जिससे पशुओं को बुखार आ जाता है। गर्मियों में भैंसों को तो दोपहर में नहलाया जा सकता है क्योंकि उनकी खाल काफी मोटी होती है। इससे उन पर खासा कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन गाय और बकरी के लिए यह नुकसानदायक बन जाता है। इससे सबसे बड़ा नुकसान पशुपालक को होता है क्योंकि दूध उत्पादन घट जाता है।
डॉ वी.के. सिंह, उपनिदेशक पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश

ऐसे में अगर पशुपालक अपने पशुओं को भरी दोपहर में नहलाएंगे तो पशुपालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। पशुचिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अजीत कुमार सिंह बताते हैं, “अगर पशु ज़्यादा समय तक खुली धूप के संपर्क में रहता है और उस पर पानी डाल दिया जाए तो वह सन स्ट्रोक बीमारी की चपेट में आसानी से आ सकता है। इस बीमारी के कारण पशु के आंखों में लालपन हो जाता है और पतला मल त्याग करने लगता है।”

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