प्रधानमंत्री फसल बीमा: बैंक और बीमा कंपनी के फंदे में फंसे किसानों को पता नहीं कैसे लें क्लेम

प्रधानमंत्री फसल बीमा: बैंक और बीमा कंपनी के फंदे में फंसे किसानों को पता नहीं कैसे लें क्लेमअधिकतर किसानों को ये पता ही नहीं कि कैसे योजना का लाभ मिलेगा।

लखनऊ। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अधिकतर किसानों को ये पता ही नहीं कि कैसे योजना का लाभ मिलेगा। फसल का नुकसान होने पर किसान बैंक, बीमा कंपनियों और कृषि विभाग के फेर में ही उलझे रहते हैं।

मथुरा जिले के बल्ले ब्लॉक के पटलोनी गाँव के किसान रवीन्द्र सिंह (45 वर्ष) ने पांच एकड़ में आलू की फसल लगायी है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए बैंक में आवेदन भी किया था। पांच दिन पहले पाला से उनकी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गयी। उन्हें ये ही नहीं पता कि अब कहां पर फसल बर्बादी की सूचना दें, जिसने बीमा का लाभ मिल सके। जब उन्हें कहीं से जानकारी नहीं मिल पायी कि कहां इसकी सूचना दें, तब इन्होंने गाँव कनेक्शन को ये बात बताई।

मेरी आलू की फसल पाले से बर्बाद हो गई। मैंने प्रधानमंत्री फसल बीमा करा रखा था तो बैंक के पास मुआवजा के लिए गया तो उन्होंने कहा कि हमारा काम सिर्फ प्रीमियम जमा करना है, इसके लिए बीमा कंपनी से बात करिए। किसी तरह बीमा कंपनी में बात की तो वो बोले ये काम बैंक का है।
रवींद्र सिंह, पटलोनी गांव, मथुरा, यूपी

रवीन्द्र सिंह बताते हैं, “छह दिन पहले आलू की फसल में पाला लग गया, जबकि इससे सिंचाई के लिए खेत की सिंचाई भी की थी। पाला से फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गयी, बैंक के पास गया तो उन्होंने कहा कि हमारा काम सिर्फ प्रीमियम जमा करना है, इसके लिए बीमा कंपनी से बात करिए।”

बीमा योजना का लाभ लेने के लिए रवीन्द्र ने तेरह हजार रुपए प्रीमियम भी जमा किए हैं। जो उनके बैंक में किसान क्रेडिट कार्ड के आधार पर ही खाते से प्रीमियम राशि काट ली। रवीन्द्र कहते हैं, “एक एकड़ में आलू लगाने में पचास हजार रुपए खर्च हो गए हैं, जबकि बीज नहीं खरीदना पड़ा था। अगर बीमा कंपनी कुछ नहीं देगी तो बहुत नुकसान हो जाएगा।” भारतीय कृषि बीमा कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक पुष्कर प्रियदर्शी कहते हैं, “बैंक की ड्यूटी होती है कि वो किसान को सही जानकारी दे। नुकसान होने पर किसान को कृषि विभाग और बैंक में जानकारी देनी होती है। जिसके बाद नुकसान का आंकलन लगाया जा सकता है।”

ये बैंक की जिम्मेदारी है कि वो किसानों को सही जानकारी दें। नुकसान होने पर किसान को कृषि विभाग और बैंक में जानकारी देनी होती है, फिर आंकलन के बाद बीमा का लाभ मिलेगा।
पुष्कर प्रियदर्शी, क्षेत्रीय प्रबंधक, भारतीय कृषि बीमा कंपनी

वो आगे बताते हैं, “जैसे किसान का पाला से नुकसान हुआ है, ऐसे में उस पूरे क्षेत्र के नुकसान का आंकड़ा लेने के बाद ही किसान को बीमा का लाभ मिलता है।” पीएमओ के अनुसार गैर-ऋणी किसानों की कवरेज के रूप में छह गुना से भी अधिक की भारी बढ़ोत्तरी हुई है, जहां खरीफ 2015 में यह संख्या 14.88 लाख थी, वहीं खरीफ 2016 में बढ़कर 102.6 लाख हो गई। जबकि स्थिति ये है कि प्रदेश के अधिकतर किसानों को इस योजना की जानकारी तक नहीं है।

गाँव कनेक्शन द्वारा आयोजित स्वयं फेस्टिवल 2017 में खेती-किसानी और समस्याओं के लिए लगाए गए कैंपों में भी किसानों ने फसल बीमा योजना के बारे में कई सवाल पूछे थे। फेस्टिवल में सामने आया था कि हजारों किसानों को फसल बीमा योजना की जानकारी नहीं थी। कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश के जारी आंकड़ों के अनुसार 14 जनवरी तक प्रदेश में कुल 13045.702 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी फसलों की बुवाई हो गयी है।

मथुरा जिले के उप कृषि निदेशक राकेश बाबू ने कहा, “इस बार सर्दी से पाले से आलू को नुकसान हुआ है, अभी तक दो किसानों ने हमें इसकी जानकारी दी है। जिन किसानों का नुकसान हुआ है, वहां पर बीमा कंपनी के प्रतिनिधि, कृषि विभाग के प्रतिनिधि और वहां के लेखपाल जाते हैं। उसी हिसाब से किसानों को बीमा का लाभ मिलता है।”

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार पीएमएफबीवाई के तहत 366.64 लाख किसान (26.50 प्रतिशत) आ चुके हैं और इस दर के आधार पर 2016-17 में खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए 30 प्रतिशत का निर्धारित लक्ष्य पार होने की संभावना है। इसके तहत कुल 388.62 लाख हेक्टेयर रकबा आया और 141339 करोड़ रुपए की राशि का बीमा हुआ।

फसल के नुकसान होने पर किसानों को जोखिम कम करने के लिए केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरुआत की है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार पीएमएफबीवाई के तहत 366.64 लाख किसान (26.50 प्रतिशत) आ चुके हैं और इस दर के आधार पर 2016-17 में खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए 30 प्रतिशत का निर्धारित लक्ष्य पार होने की संभावना है। इसके तहत कुल 388.62 लाख हेक्टेयर रकबा आया और 141339 करोड़ रुपए की राशि का बीमा हुआ।

देश के लाखों किसानों को नहीं पता है कैसे उन्हें इस योजना का लाभ लेना है।

अभी हाल में ही खाद्य एवं कृषि नीति विश्लेषक देविंदर शर्मा ने भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर ये सवाल उठाए थे कि कही बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने की तरकीब तो नहीं है ये योजना। सरकार के निजी कंपनियों पर अंधे विश्वास को लेकर उन्होंने इस योजना पर सवाल खड़े किए थे। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक साधारण बीमा योजना लग रही है जिसमें नुकसान होने पर निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियां उसकी औसत प्रतिपूर्ति करेंगी न कि किसानों को फसल के नुकसान के बराबर बीमा कवर देंगी।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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