सफीपुर विधानसभाः एक ही प्रत्याशी ने छह बार जीत हासिल की 

vineet bajpaivineet bajpai   19 Jan 2017 3:53 PM GMT

सफीपुर विधानसभाः एक ही प्रत्याशी ने  छह बार जीत हासिल की सफीपुर विधानसभा का क्षेत्र अभी भी विकास की किरणों से दूर है

श्रीवत्स अवस्थी

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

उन्नाव। सफीपुर विधानसभा जिले की राजनीति में अपना विशेष स्थान रखती है। मखदूम शाह सफी की दरगाह के चलते देश-विदेश में चर्चित यह क्षेत्र कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था। लेकिन, समय के साथ कमजोर पड़ती कांग्रेस को किनारे कर सपा ने इस क्षेत्र पर कब्जा जमा लिया।

हालांकि, दलित वोटरों की संख्याबल के आधार पर इस विधानसभा क्षेत्र को सुरक्षित क्षेणी में रखा गया है बावजूद इसके बसपा को इस विधानसभा क्षेत्र में कोई खास उपलब्धि नहीं मिली। लेकिन दल-बदल की राह पकड़कर राजनैतिक हित साधने वाले सुन्दरलाल अब तक इस क्षेत्र से छह बार विधायक रह चुके हैं।

विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 286958 हैं, जिसमें पुरुष मतदाता 161123 व महिला मतदाता 125835 हैं। 2012 के चुनाव में कुल दस प्रत्याशियों में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सुधीर कुमार ने 72869 मत प्राप्त कर विजय प्राप्त की थी, जबकि बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी रामबरन को 63815 मत मिले थे। भाजपा के राधेश्याम और कांग्रेस के मनीष कुमार को क्रमश: तीसरा और चौथा स्थान मिला था।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुरक्षित सीट होने के बावजूद बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी को एक बार भी जीत का स्वाद नहीं मिला है। इस विगत चार विधानसभा चुनावों में लगातार बसपा के प्रत्याशी को दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी के बाबू लाल को दो बार जीत हासिल हुई है। कांग्रेस का प्रत्याशी भी यहां से जीत चुका है। एक महत्वपूर्ण बात और है कि अलग-अलग पार्टियों से प्रत्याशी बने सुंदरलाल ने कुल चौदह बार हुए चुनावों में छह बार विजय पताका फहराया है।

गंगा नदी के तट पर स्थित सफीपुर विधानसभा का क्षेत्र अभी भी विकास की किरणों से दूर है। जहां प्रत्येक वर्ष गंगा का विकराल रूप सैकड़ों गाँव को अपने आगोश में लेकर तहस-नहस कर देता है। क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बाढ़ का कोई स्थाई निदान अभी तक नहीं हो पाया है। बिजली, सड़क, बेरोजगारी अपने आप में एक समस्या है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सफीपुर में स्वास्थ्य कर्मियों की कार्यप्रणाली से स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त रहता है। विधानसभा के कई क्षेत्रों में कच्ची दारू कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है, जिससे आए दिन हादसे भी होते रहते हैं। इन सब समस्याओं के बीच विधानसभा चुनाव 2017 में परचम किस पार्टी का लहराता है, यह समय बताएगा।

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