मिर्च की खेती से किसानों के जीवन में मिठास 

Deepanshu MishraDeepanshu Mishra   2 March 2017 6:23 PM GMT

मिर्च की खेती से किसानों के जीवन में मिठास प्रदेश के कई जिलों के किसान मिर्च की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

दीपांशू मिश्रा/ जीतनाग, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

बाराबंकी/सोनभद्र/चित्रकूट। प्रदेश के कई जिलों के किसान मिर्च की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। यहां पैदा होने वाली मिर्च सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक पहुंच रही है।

बाराबंकी जिले के बेलहरा ब्लॉक के दर्जनों गाँवों में बड़ी मात्रा में मिर्च की खेती होने लगी है। चिरैया गाँव के रहने वाले किसान सुरेश कुमार (45 वर्ष) बताते है, “पिछले वर्ष यहां के कई किसानों ने मिर्च की खेती की शुरुआत की है। इस खेती में अच्छा मुनाफा होने के कारण किसानो का रुझान मिर्च की खेती के तरफ बढ़ गया है।”

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सुरेश ने आगे बताया, “ मिर्च की खेती करनी काफी आसान है। मिर्च की फ़सल में 10 से 15 दिनों के बीच पानी लगाया जाता है। यदि मौसम गर्म रहता है तो छह से आठ दिन में ही पानी लगाने की जरुरत पड़ जाती है।’’

वहीँ सोनभद्र जिले को आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण पिछड़ा माना जाता है, लेकिन लोगों की ये मानसिकता बदलनी शुरू हो गई है। अब सोनभद्र के लोग खेती में निपुण हो रहे हैं। जिले में हरी मिर्च की खेती भी बड़े पैमाने में हो रही है। देश के दूसरे हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में भी यहां की मिर्च का निर्यात होती है।

जिला मुख्यालय से लगभग 20 किमी दूर धोरावल ब्लॉक में किसान मिर्च की खेती अधिक मात्रा में कर रहे हैं। बकौली गाँव के रहने वाले गजेंद्र बहादुर सिंह (51 वर्ष) बताते हैं, ‘मैंने पिछले वर्ष भी मिर्च की खेती की थी जिससे काफी मुनाफा हुआ था। इस वर्ष भी मैंने तीन एकड़ में मिर्च की खेती की है। मिर्च की पैदावार हमारे सोनभद्र में अच्छी हो रही है। हम लोग मिर्च को दूसरे प्रदेशों में भी भेजते हैं।’

सोनभद्र के घोरावल, करमा, राबर्ट्सगंज, दुद्धी क्षेत्र में किसानों ने पारंपरिक खेती का ढर्रा बदलते हुए अब हरी मिर्च की खेती शुरू कर दी है। इन क्षेत्रों में हरी मिर्च के साथ-साथ कश्मीरी मिर्च की भी खेती की जा रही है।

गजेंद्र आगे बताते हैं, “शुरुआत में मिर्च की पौध लगाने के बाद काफी बारिश हुई जिससे फसल को काफी नुकसान हुआ लेकिन अब मौसम अनुकूल होने के कारण फसल की पैदावार अच्छी हो गई है। जो बाजारों में बिकने के लिए जा रही है।”

देश के कई राज्यों के साथ-साथ बांग्लादेश के व्यापारी भी हरी मिर्च का व्यापार कर रहे हैं। मालदा व बड़ौदा बॉर्डर से अधिक मिर्च का व्यापार हो रहा है। दिल्ली में भी सोनभद्र की मिर्च की डिमांड काफी है। यहां की मिट्टी लाल होने के कारण मिर्च के पौधे के लिए लाभदायक हैं।
नलिन सुंदरम भट्टू , जिला उद्यान अधिकारी, सोनभद्र

सोनभद्र जिले के उद्यान निरीक्षक राजेंद्र यादव बताते हैं, ‘गतवर्ष बड़े पैमाने पर हरी मिर्च की खेती से उत्साहित किसान इस बार भी इसे आमदनी का मुख्य जरिया बनाते हुए खेतों में मिर्च बो रहे हैं। जिले में मिर्च की खेती बहुत तेजी से बढ़ रही है। इस बार जिले में तीन हजार एकड़ क्षेत्रफल में हरी मिर्च की खेती की गई है।’ हरी मिर्च की खेती करने वाले किसानों की सूची बनाई जा रही है। उन्हें बाज़ार दिलाने का भी प्रयास किया जा रहा है। वहीं ज्वार, बाजारा, अरहर जैसी कम सिंचाई वाली फसलों के लिए जाने जाना वाले चित्रकूट जिले में अब अचारी मिर्च की खेती भी शुरू की गयी है।

कृषि विज्ञान केन्द्र गनीवां के वैज्ञानिकों के प्रयास से चित्रकूट में भी अचारी मिर्च की खेती की जा रही है। जिले के गनीवां, कुई और बनाड़ी गाँव की 29 महिला किसानों को मिर्च के उन्नत किस्म के पौधे दिए गए हैं, इससे महिला किसानों को अतिरिक्त आय होगी।कुई गाँव की महिला किसान मुन्नी देवी (50 वर्ष) कहती हैं, “अभी तक हम लोग केवल बाजारा, अरहर की ही खेती करते हैं, इस बार मिर्च की फसल लगायी है, इस मिर्च की खेती अभी तक हमारे यहां नहीं की जाती थी, लेकिन अब मेरी जैसी कई महिलाओं ने लगायी है।”

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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