प्रदेश में पहली महिला किसानों की कंपनी बनी

प्रदेश में पहली महिला किसानों की कंपनी बनीडेयरी में अपने पशुओं का दूध की सप्लाई करती महिला। फोटो: गाँव कनेक्शन 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

प्रतापगढ़। डेयरी के कारोबार को पुरुषों का काम कहा जाता है, लेकिन प्रतापगढ़ की आठ सौ से भी अधिक महिलाएं इस धारणा को बदलने में लगी हैं। डेयरी के कारोबार से उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है।

संस्था का दावा है कि यह प्रदेश की पहली महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी है। प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर उत्तर-पूर्व दिशा में पट्टी ब्लॉक के 39 ग्राम पंचायतों में तरुण चेतना और टाटा ट्रस्ट ने मिलकर श्वेत धारा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी की शुरुआत की है। इसमें पट्टी ब्लॉक की आठ सौ महिलाएं जुड़ी हैं। इन 39 ग्राम पंचायतों में कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं, जहां पर महिलाएं दूध का कलेक्शन करती हैं। बहुता ग्राम पंचायत की शमा खातून (35 वर्ष) के घर पर भी कलेक्शन सेंटर बनाया गया है। शमा बताती हैं, “सुबह-शाम मेरे ग्राम पंचायत की महिलाएं यहां पर दूध लेकर आ जाती हैं, जिसकी जांच करके हम उसे एकत्र कर लेते हैं।”

उन्होंने बताया कि समिति के सभी पदों पर महिला सदस्य ही हैं। सभी महिलाएं उत्पादित दूध को एक साथ इकट्ठा करके कलेक्शन सेंटर पर दे देती हैं। इससे उन्हें दूध का अच्छा दाम पाने के लिए मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती। इस बारे में तरुण चेतना के निदेशक नसीम अंसारी कहते हैं, “हम लोग महिलाओं के लिए कुछ काम करना चाहते थे। इसी सोच के साथ हमने यह काम किया। यही कारण है कि समिति के हर पद पर महिला को ही तैनात किया गया है। इसमें सिर्फ महिलाओं को जोड़ा गया है।

हर महिला पशुपालक को दूध का रुपया दस दिन बाद उनके बैंक खाते में भेज दिया जाता है।” तरुण चेतना के क्वार्डिनेटर मोहम्मद नसीम कहते हैं, ‘‘पालतू पशुओं का काम महिलाएं ही करती हैं, पर उनको कोई लाभ नहीं मिल पाता था। इस योजना से महिलाओं के बैंक खाते में सीधा रुपया भेजा जाता है।” बता दें कि श्वेत धारा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी शुरू करने में टाटा ट्रस्ट ने आर्थिक सहायता की है और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड ने इसमें तकनीकी सहायता की है। वहीं, समिति से जुड़कर अपने परिवार का विकास कर रहीं धौरहरा गाँव की रीना देवी (40 वर्ष) बताती हैं, “मेरे पास दो भैंसें हैं। पहले मैं गाँव में ही दूध बेचती थीं। मगर उसका मुझे सही दाम नहीं मिलता था। हालांकि, अब मुझे 42 रुपए प्रति लीटर की दर से भुगतान मिलता है। पहले मैं 35 रुपए में एक लीटर दूध बेचा करती थी।”

ऐसे होता है काम

महिलाएं 39 केंद्रों पर दूध एकत्र करती हैं। वहां से कंपनी सारा दूध नारंगपुर में बने केंद्र पर भेजता है। इसके बाद दूध मदर डेयरी में भेज दिया जाता है। हर दिन बारह सौ लीटर के करीब के दूध का कारोबार किया जाता है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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