यहां मतदान से एक दिन पहले गाँव के बुजुर्ग चौपाल लगाकर तय करते हैं कि किसको देना है वोट

यहां मतदान से एक दिन पहले गाँव के बुजुर्ग चौपाल लगाकर तय करते हैं कि किसको देना है वोटचुनाव मतदान से एक दिन पहले गाँव के बड़े-बुजुर्ग बातचीत करने के बाद तय करते हैं कि किस पार्टी को मतदान करना है।

बसंत कुमार, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण का चुनाव 19 फरवरी चुनाव हो चुका है। राजधानी क्षेत्र के बीकेटी विधानसभा क्षेत्र के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में अब भी बड़े-बुजुर्ग ही किसको वोट करना है, तय करते हैं।

हमारे यहाँ अब भी चुनाव मतदान से एक दिन पहले गाँव के बड़े-बुजुर्ग बातचीत करने के बाद तय करते हैं कि किस पार्टी को मतदान करना है।
रिंकी रावत,निवासी, बख्शी का तालाब (बीकेटी) विधानसभा क्षेत्र

हमारे गाँव में मतदान से एक-दिन पहले बड़े-बुजुर्गों की एक छोटी सी चौपाल लगती है। जहां वे पार्टियों के बारे में चर्चा करते हैं और किसको वोट करना है यह सब बड़े-बुजुर्ग मिलकर ही तय करते हैं।
रिंकी रावत

लोग मतदान केंद्र पर जाकर कौन किसे वोट कर रहा, किसे मालूम चलता है। शाम को जो बैठक होती है, उसमें पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी शामिल होती हैं।
रिंकी रावत

गाँवों में शुरू से ही यह परम्परा रही है। सब मिलकर ही चर्चा करते हैं और तय करते हैं कि किसको वोट देना है और किसको नहीं देना है। मिल-बैठकर जो बैठक होती है उसको ज्यादातर लोग मानते भी हैं और कुछ नहीं भी मानते हैं। हालांकि गाँवों में अब भी ज्यादातर लोग जागरूक नहीं है, जिसके कारण जागरूक लोग विचार-विमर्श कर तय करते हैं।
अनिल कुमार, बीकेटी में पंचर की दुकान चलाने वाले

इस बार बीकेटी से ये प्रत्याशी हैं मैदान में

इस बार बख्शी का तालाब सीट से भाजपा के अविनाश त्रिवेदी एवं बसपा से पूर्व मंत्री नकुल दुबे और सपा से निवर्तमान विधायक गोमती यादव मैदान में है।

भले ही घर के बड़े-बुजुर्ग तय करते हों, लेकिन अब ज्यादातर महिलाएं अपने मन से वोट देती हैं। अब हम घर वालों के कहने पर किसी को भी वोट नहीं करती है। व्यक्तिगत रूप से मैं विकास करने वाले उम्मीदवार को वोट देती रही हूँ।
कृष्णा, आगनबाड़ी कार्यकत्री

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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