युवाओं को झटका: बैंकों से कर्ज़ न मिलने से नहीं शुरू हो पाए सैकड़ों एग्री जंक्शन

Divendra SinghDivendra Singh   3 March 2017 6:30 PM GMT

युवाओं को झटका: बैंकों से कर्ज़ न मिलने से नहीं शुरू हो पाए सैकड़ों एग्री जंक्शनबैंक से ऋण न मिल पाने के कारण ज्यादातर जिलों में एग्री जंक्शन नहीं शुरू हो पाए।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। किसानों को बेहतर सुविधा देने के लिए एग्री जंक्शन योजना 2015-16 की शुरुआत तो कर दी गयी, लाभार्थियों को लाइसेंस भी मिल गया, लेकिन बैंक से ऋण न मिल पाने के कारण ज्यादातर जिलों में एग्री जंक्शन नहीं शुरू हो पाए।

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सीतापुर जिले के सिधौली ब्लॉक के रहने वाले कमलेश कुमार (35 वर्ष) ने पिछले वर्ष एग्री जंक्शन योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया था। कमलेश कुमार कहते हैं, “लखनऊ के रहमान खेड़ा में हम लोगों को ट्रेनिंग भी दी गयी थी, लेकिन बैंक से अब तक लोन ही नहीं मिल पाया, जिससे केन्द्र न शुरू कर पाए।”

बीज और खाद की दुकानों पर बैठने वाले गैर जानकारों को रोकने और कृषि से शिक्षित युवाओं को रोजगार के मौके देने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षित कृषि उद्यमी स्वावलंबन योजना के तहत एग्री जंक्शन (वन स्टॉफ शॉप) खोलने की शुरुआत की थी। योजना शुरू करते वक्त तर्क ये भी था कि अगर खेती के जानकार ही दवा और खाद बेचेंगे तो किसानों को फायदा होगा। इसके तहत प्रदेश में कृषि से स्नातक और परास्नातक एक हजार युवाओं को एग्री जंक्शन शुरू करना था।

सीतापुर जिले के कृषि उप निदेशक विनोद कुमार सिंह यादव कहते हैं, “अभी तक जिन लाभार्थियों को योजना का लाभ मिला है उन्हीं के डाक्यूमेंट पूरे थे। इसके बाद चुनाव की तैयारियों में सब लग गए थे। अब चुनाव के बाद सभी को लोन मिल जाएगा।” एक एग्री जंक्शन केंद्र को स्थापित करने में चार लाख रुपए का खर्च आता है। कृषि स्नातक या परास्नातक बेरोज़गारों को 3.50 लाख रुपए का ऋण दिया जाना था। 50 हज़ार की राशि लाभार्थी को लाभांश के तौर पर देना होता है।

यही नहीं प्रतापगढ़ जिले के शिवगढ़ ब्लॉक के देल्हूपुर गाँव के अनिल गुप्ता (30 वर्ष) ने भी एग्री जंक्शन योजना के लिए आवेदन किया था। अनिल गुप्ता कहते हैं, “पिछले साल ही आवेदन किया था, पूरे कागज भी पूरे थे, कई बार विभाग में चक्कर भी लगाया। लेकिन अभी तक लोन नहीं मिल पाया। जब जाओ तो कहते हैं, जल्दी ही हो जाएगा।”

पूरे प्रदेश से करीब 1300 आवेदन आए थे, जिनमें से 867 लोगों को प्रशिक्षण और लाइसेंस भी दिया जा चुका है। लेकिन बैंक लोन ही नहीं दे रहे हैं, जिस वजह से अभी तक सिर्फ 300 एग्री जंक्शन शुरू हो पाए हैं।
मो. आरिफ सिद्दीकी, अपर कृषि निदेशक (प्रसार) , उत्तर प्रदेश कृषि विभाग

अभी तक जिन लाभार्थियों को योजना का लाभ मिला है उन्हीं के डाक्यूमेंट पूरे थे। इसके बाद चुनाव की तैयारियों में सब लग गए थे। अब चुनाव के बाद सभी को लोन मिल जाएगा।
विनोद कुमार सिंह यादव, कृषि उप निदेशक, सीतापुर

सीतापुर जिले के 50 युवाओं ने एग्री जंक्शन के लिए आवेदन किया था, जिसमें से अभी सिर्फ दो लोगों को बैंक से लोन मिल पाया है। अपर कृषि निदेशक ने आगे बताया, “हमने अभी तक चार बार बैंकों से मीटिंग भी कि जिससे की लाभार्थियों को लोन मिल जाए, प्रदेश स्तर पर तो बात हो जाती है, लेकिन जिला स्तर पर जाकर बात वहीं रुक जाती है।” वो आगे बताते हैं, “ऐसा नहीं है कि सभी जिलों में ऐसा हो रहा है, पीलीभीत, अमरोहा और बिजनौर जिले के सारे ब्लॉकों में एग्री जंक्शन शुरू हो गए हैं। उत्तर प्रदेश के 821 ब्लॉकों में पहले चरण में एक-एक सेंटर खुलने थे, वर्ष 2016 में एक हज़ार युवाओं को चुनकर उन्हें केंद्र खुलवाना था, जिसमें से 31 जनवरी 2016 तक 867 युवाओं को चुन लिया गया है। इनकी ट्रेनिंग भी एक फरवरी से शुरू की गयी थी। सभी लाभार्थियों को दस दिन का प्रशिक्षण भी दिया गया था।

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