यूपी चुनावः चुनावी मैदान में ढहेंगे पुराने किले

यूपी चुनावः चुनावी मैदान में ढहेंगे पुराने किलेविधानसभा चुनाव को लेकर दिलचस्प हो चुकी शोहरतगढ़ सीट पर इस बार बदलाव साफ है।

सुजीत अग्रहरि ,स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर)। विधानसभा चुनाव को लेकर दिलचस्प हो चुकी शोहरतगढ़ सीट पर इस बार बदलाव साफ है। कुर्मी व मुस्लिम बाहुल्य इलाके में नए नेतृत्व के उभार से नया समीकरण बना है। पिछले पांच चुनावों से दो परिवारों के बीच दल बदल कर नेतृत्व चलता रहा है, लेकिन इस बार नए नेतृत्व के उभार से चुनावी जंग में पुराने किले ढहते दिख रहे हैं और नया सूरज उगने के आसार साफ हैं। वहीं गठबंधन के बाद भी सपा व कांग्रेस प्रत्याशी के मैदान में होने से ऊहापोह की स्थिति बनी है।

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शोहरतगढ़ विधानसभा सीट पर चुनावी जंग को फतह करने के लिए हर प्रत्याशी लालायित हैं। पिछले पांच चुनावों में कुर्मियों के दम पर दल बदल कर दो बार भाजपा (वर्ष 1993 व 1996) व एक बार कांग्रेस (वर्ष 2007) से विधायक रहे रवींद्र प्रताप चौधरी इस चुनाव में असहाय दिख रहे हैं। कांग्रेस में रहते समय पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों में निष्कासित व बाद में वापसी के बाद सपा कांग्रेस गठबंधन में टिकट न मिलता देख सियासी किले को बचाने के लिए रवींद्र प्रताप राष्ट्रीय लोक दल से मैदान में हैं। लेकिन, इस चुनाव में कुर्मी बिरादरी से नया नेतृत्व चौधरी अमर सिंह के भाजपा गठबंधन अपना दल से मैदान में होने से जीत का नया समीकरण बना है। कट्टर भाजपाई बेल्ट में शुमार कुर्मियों का रुझान इस बार नया नेतृत्व चौधरी अमर पर होने से रवींद्र प्रताप का किला ढहता दिख रहा है।

किले के स्वामी इसे बचाने के लिए लीडिंग पार्टी से टिकट न मिलने के बाद क्षेत्रीय दल से मैदान में है। गाड़ियों में ही बैठ कर वोट समेटने वाले रवींद्र प्रताप ढहते किले को बचाने के लिए एक-एक वोट सहेजने में जद्दोजहद कर रहे हैं। वहीं 2002 में कांग्रेस से विधायक रहे पूर्व मंत्री स्व. दिनेश सिंह की पत्नी लालमुन्नी सिंह 2012 में सपा से जीत दर्ज कर नेतृत्व किया। इस बार विकास पुरुष स्व. दिनेश सिंह के सियासी किले को सलामत रखने के लिए मैदान में उतरे पुत्र उग्रसेन सिंह को पहले ही वोटों के ध्रवीकरण ने खासा बेचैन कर दिया है। सपा कांग्रेस गठबंधन के बाद भी प्रदेश की एक मात्र सीट शोहरतगढ़ पर सपा से उग्रसेन और कांग्रेस से पूर्व विधायक अनिल सिंह मजबूती के साथ मैदान में डटे है। इससे वोटरों व कार्यकर्ताओं में ऊहापोह की स्थिति बनी है। हालांकि दोनों प्रत्याशी पार्टी से हरी झंडी मिलने के बाद जीत के लिए संघर्षरत हैं।

इस सीट पर अब तक खाता न खोल पाने का दंश झेल रही बसपा दो चुनावों के सेकेंड विनर मुमताज अहमद की जगह दल बदल कर सपा से बसपा में आए नौगढ़ नगर पालिका चेयरमैन जमील सिद्दीकी पर भरोसा जताया है, लेकिन, मुस्लिमों के बीच अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाके में नया नेतृत्व आल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिम की बढ़ती लोकप्रियता ने सपा, कांग्रेस व बसपा प्रत्याशियों में बेचैनी ला दिया है। पिछले चुनाव में 20236 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रही पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब ने भी इस सीट पर मुस्लिम समाज में मजबूत पकड़ दिखाया था। जिसे इस बार भी कम नहीं आंका जा सकता है। हालांकि पिछली बार राजघराने के सदस्य योगेंद्र प्रताप सिंह मैदान में थे। इस बार भाजपा के बगावती राधारमण त्रिपाठी मैदान में है।

आंतरिक सुरक्षा बड़ा मुद्दा

शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र नेपाल के बार्डर से जुड़ा है। इसके चलते यहां आंतरिक सुरक्षा बड़ा मुद्दा बना है। इन बार्डरों से भारत विरोधी तत्व, आईएसआई व तस्कर आसानी से अपनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। घुसपैठ पुलिस व सीमा सुरक्षा बल की कार्यप्रणाली व लापरवाही को उजागर करता है।

सियासी जमीन तलाश रहे प्रत्याशी

चुनाव में प्रमोद कुमार मिश्र (राष्ट्रीय आम जन सेवा पार्टी), विजय लक्ष्मी चैधरी (भारतीय जन बेरोजगार छात्र दल), शमसुद्दीन खान (बहुजन महा पार्टी), डॉ. सत्येंद्र नाथ पाण्डेय (आम जनता पार्टी), अमीरूल्लाह, डॉ. आशीष प्रताप सिंह, बृजवासिनी गिरी, सुखराज यादव निर्दल मैदान में उतर कर सियासी जमीन तलाश रहे हैं।

शोहरतगढ़ पर ओवैसी की निगाहें

मुस्लिम बाहुल्य शोहरतगढ़ सीट पर एआईएमआईएम प्रेसीडेंट असदउद्दीन ओवैसी की निगाह खास बनी है। जिले की एक मात्र सीट शोहरतगढ़ से पूर्वांचल प्रभारी हाजी अली अहमद को मैदान में उतारा है। जिसे जीत दिलाने के लिए अल्पसंख्यक भी लामबंद होते दिख रहे हैं। प्रतिष्ठा परक सीट पर ओवैसी 19 अप्रैल 2016 को रोड शो व 19 दिसंबर 2016 को (गनेशपुर) में जनसभा कर ताकत दिखा चुके हैं। प्रत्याशी हाजी अली अहमद एआईएमआईएम की मजबूत पकड़ के दम पर जीत पक्की बता रहे हैं।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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