सूखते तालाब मछलियों के लिए बन रहे काल  

सूखते तालाब मछलियों के लिए बन रहे  काल   सूखे तालाब से मछली पालकों को हो रहा है नुकसान।

मोहम्मद परवेज, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट
तिर्वा (कन्नौज)।
‘‘पहले मैं मछली पालन का कारोबार करता था। आज पानी की कमी के कारण काम छोड़ दिया है। अब मैं कानपुर से मछली खरीदकर व्यापार करने को मजबूर हूं। इसमें उतना फायदा नहीं होता है।’’ यह कहना है कन्नौज जिला मुख्यालय से करीब 23 किमी दूर बसे उमर्दा ब्लॉक क्षेत्र के गाँव बेलामऊ सरैया निवासी नीरज बाथम (30 वर्ष) का।

यह समस्या सिर्फ नीरज की ही नहीं है। जिले में करीब 600 लोग तालाबों में मछली पालने का कारोबार करते हैं। गर्मी के इस मौसम में लगभग सभी को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। कई तालाब तो ऐसे हैं, जिसमें अभी से ही धूल उड़ने लगी है। कुछ में थोड़ा पानी रह गया है, जिससे मछलियों के मरने की संभावना प्रबल हो जाती है। साथ ही मत्स्य पालक पानी की कमी के चलते कम रेट में मछलियां बाजार में बिक्री कर देते हैं, ताकि उनका पैसा निकल आए।

“जुलाई में ही नए मछली बीज डालें। राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत के लोग ही तालाबों में पानी भरवाते हैं। मेरे विभाग का इसमें कोई रोल नहीं है। गर्मी के मौसम में जो छोटे मत्स्य पालक पानी का इंतजाम नहीं कर पाते हैं वह काम बंद कर देते हैं।”

जीसी यादव, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य विभाग-कन्नौज

इंदरगढ़ क्षेत्र के झुलनापुर निवासी मोहम्मद मुकीम (35 वर्ष) बताते हैं, ‘‘पहले पानी आता था, तालाब भी भर जाता था। मछली के अलावा सिंघाड़े भी कर लेते थे। अब तीन साल से पानी ही नहीं आया है। तालाब भी सूखा पड़ा है। इसलिए मछली पालन और सिंघाड़ा दोनों ही बंद हो गया।’’

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