गरीबों में शिक्षा की अलख जगाने की मुहिम 

गरीबों में शिक्षा की अलख जगाने की मुहिम गाँवों में रहने वाले गरीब परिवारों तक इस सुविधा को पहुंचाने के लिए जिला शिक्षा विभाग ने एक खास पहल शुरू की है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

वाराणसी। प्रदेश सरकार कम आय वर्ग के परिवारों के बच्चों को निजी विद्यालयों में नि:शुल्क प्रवेश देने के लिए शिक्षा का अधिकार कानून बना चुकी है, लेकिन अधिकांश लोगों को इस नियम की जानकारी नहीं है। इसलिए इस सुविधा का लाभ मात्र शहरी गरीबों तक ही सीमित है। गाँवों में रहने वाले गरीब परिवारों तक इस सुविधा को पहुंचाने के लिए जिला शिक्षा विभाग ने एक खास पहल शुरू की है।

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जिला शिक्षा विभाग अपने शिक्षा का अधिकार अभियान के साथ जिले में शिक्षा के विस्तार पर बड़े स्तर पर काम रही संस्था आशा ट्रस्ट के साथ मिलकर गाँवों रहने वाले गरीब वर्ग के परिवारों के बच्चों का पंजीकरण करवाने में मदद कर रहा है।

इस पहल के बारे में शिक्षा के अधिकार अभियान के संयोजक अजय कुमार पटेल बताते हैं, “उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी नवीनतम नियमावली में गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिए जाने की योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया प्रदेश में शुरू कर दी है।’’

वो आगे बताते हैं, “इस सुविधा का लाभ शहरी गरीब वर्ग के परिवारों के साथ-साथ गरीब वर्ग के बच्चों को भी मिले इसके लिए विभाग और सामाजिक संस्था आशा ट्रस्ट मिलकर गाँवों में इस योजना का प्रचार कर रहे हैं।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12 (1) के अंतर्गत कम आय वर्ग के बच्चों को कक्षा एक में निजी विद्यालयों में प्रवेश नि:शुल्क दिया जाता है और बड़ी कक्षाओं में प्रवेश पर 25 फीसदी छूट दी जाती है। पिछले वर्ष प्रदेश में आरटीई के तहत 4,400 बच्चों के दाखिले हुए थे।

आशा ट्रस्ट में इस पहल के संचालक वल्लभाचार्य पांडेय ने बताया कि समाज में आज शिक्षा एक उद्योग का रूप ले चुकी है, शिक्षा माफिया निजी स्कूल खोलकर मोटी फीस की उगाही कर रहे हैं, ऐसे में सभी के लिए समान शिक्षा के अवसर मिलने की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है। इसलिए हम गाँव-गाँव जाकर लोगों से मिलते हैं और उन्हें इस सुविधा का लाभ दिलाने में मदद कर रहे हैं।

समाज में आज शिक्षा एक उद्योग का रूप ले चुकी है, शिक्षा माफिया निजी स्कूल खोलकर मोटी फीस की उगाही कर रहे हैं, ऐसे में सभी के लिए समान शिक्षा के अवसर मिलने की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है। इसलिए हम गाँव-गाँव जाकर लोगों से मिलते हैं और उन्हें इस सुविधा का लाभ दिलाने में मदद कर रहे हैं।
वल्लभाचार्य पांडेय, संचालक, आशा ट्रस्ट

भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2013-14 में देश भर के प्राइवेट स्कूलों में कुल 21 लाख सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित थीं, लेकिन केवल 29 फीसदी सीटें ही भर पाईं। उत्तर प्रदेश की हालत काफी बुरी है, इस नियम के तहत सूबे में महज तीन प्रतिशत दाखिले ही हुए।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 25 फरवरी 2016 को राइट टू इंफॉरमेशन अधिनियम में हुए नए संशोधन में यह स्पष्ट किया गया है कि इस एक्ट के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कम आय वर्ग के परिवारों को इस व्यवस्था में लाभ पा सकते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिले के केवल शहरी क्षेत्र के चिन्हित वार्डों तक ही यह व्यवस्था शुरू हो पाई है।

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