बिना प्रश्नपत्र के ही तीन दिनों में ख़त्म होगी परीक्षा 

बिना प्रश्नपत्र के ही तीन दिनों में ख़त्म होगी परीक्षा एक वर्ष की पढ़ाई और परीक्षा मात्र तीन दिनों में।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। एक वर्ष की पढ़ाई और परीक्षा मात्र तीन दिनों में। परिषदीय स्कूलों में हो रही पढ़ाई तो हमेशा सवालों के घेरे में रहती ही है, लेकिन अब परिषदीय स्कूलों में परीक्षाएं भी औपचारिकता मात्र बनकर रह गयी हैं।

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बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों में 18 मार्च से परीक्षाओं की शुरुआत होनी है, जिनको औपचारिकता के चलते मात्र तीन दिनों में ही संचालित करवाया जाएगा। उस पर सवाल यह कि छपे हुए प्रश्नपत्र भी बच्चों को मिल सकेंगे या नहीं। परीक्षाएं 18 मार्च से शुरू होनी हैं जो 21 मार्च तक जारी रहेंगी। 19 मार्च को रविवार की छुट्टी के चलते परीक्षा के लिए मात्र तीन दिन बच्चों को दिए गए हैं। उस पर इस बार बच्चों को परीक्षा के समय प्रश्नपत्र भी नहीं मिल सकेगा। कारण है शासन की ओर से प्रश्नपत्र छापने के लिए अभी तक बजट नहीं भेजा गया है। जबकि शेड्यूल के अनुसार विभाग को 13 मार्च तक प्रश्नपत्र छपवाकर डायट कार्यालय में सौंपने की जिम्मेदारी निभानी है, जिससे समय पर परीक्षाएं शुरू करवायी जा सकें।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय कठिंगरा, काकोरी के प्रधानाध्यापक शाहिद अली आब्दी कहते हैं, “परिषदीय बच्चों का भविष्य तो हमेशा से अंधेरे में ही रहता है। कभी किताबें नहीं तो कभी प्रश्नपत्र नहीं। तीन दिनों में परीक्षाएं संचालित करवाने में हम शिक्षकों को तो कोई दिक्कत नहीं होगी लेकिन बच्चों के लिए यह मुसीबत का सबब होंगी और यह परीक्षाएं केवल औपचारिकता बन कर रह जाएंगी। अगर कक्षा 6 से 8 तक की ही बात करें तो बच्चों के पास कम से कम दस विषय होते हैं और प्राथमिक में कम से कम पांच विषय तो होते ही हैं। ऐसे में तीन दिनों में बच्चे वार्षिक परीक्षाएं किस तरह से दे सकेंगे समझना मुश्किल है।”

मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक महेन्द्र सिंह राणा कहते हैं, “परीक्षा के शेड्यूल के बारे में मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। परीक्षा का शेड्यूल सचिव साहब के द्वारा जारी किया गया है इसलिए मैं इस विषय में क्या कहूं। जहां तक प्रश्नपत्रों की छपाई की बात है उसके लिए बजट का इंतजार किया जा रहा है।”

विभाग की ओर से परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। हमारी ओर से तैयारी भी पूरी कर ली गयी है। प्रश्नपत्रों की कम्पोजिंग भी हो गयी है, लेकिन इनकी छपाई के लिए अभी कोई निर्देश नहीं आए हैं। शासन की ओर से इसके लिए बजट का इंतजार है। हम लोग इंतजार कर रहे हैं, यदि जल्द ही बजट नहीं आता है तो प्रश्नपत्रों को विभाग की ओर से ही छपवाया जाएगा।
प्रवीन मणि त्रिपाठी, बेसिक शिक्षा अधिकारी

वर्ष 2015 तक ब्लैकबोर्ड पर लिखे जाते थे प्रश्न

प्रदेश के 1.98 लाख प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वाले 1.96 करोड़ बच्चों की परीक्षाएं होनी हैं। अकेले लखनऊ की बात करें तो लखनऊ में बेसिक शिक्षा परिषद के लगभग 2023 स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिसमें लगभग दो लाख 33 हजार बच्चे पढ़ रहे हैं। इन बच्चों की वार्षिक परीक्षाओं में वर्ष 2015 तक प्रश्नों को ब्लैकबोर्ड पर लिखा जाता था और बच्चे जो कॉपी घर से लाते थे उस पर उसके जवाब लिखते थे।

लेकिन पिछले वर्ष वार्षिक परीक्षाओं के लिए अलग से बजट जारी किया जाना शुरू हुआ था, जिसके तहत 15 रुपए प्रति छात्र स्कूलों को कॉपी के लिए दिया जाता था और छपे हुए प्रश्नपत्र उपलब्ध करवाये जाते थे। लेकिन पिछले वर्ष प्रश्नपत्र और कॉपियों की उपलब्धता में परीक्षा देने के बाद एक बार फिर बच्चों के सामने वही पुरानी स्थिति खड़ी होती दिख रही है।

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