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नवरात्र में भी नहीं बढ़े थोक में आलू के रेट, किसानों की लागत भी डूबी

नवनीत द्विवेदी , स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

उन्नाव। रेट बढ़ने के इंतजार कर रहे आलू किसानों को अप्रैल में भी मायूसी हाथ लगी है। किसानों को उम्मीद थी कि नवरात्र शुरु होने पर कुछ रेट बढ़ेंगे लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी है। नवरात्र खत्म होने को आ गए हैं लेकिन रेट 3 से 4 रुपये के बीच ही हैं। हजारों किसानों का स्टोर फुल होने के चलते कोल्ड स्टोर में भी नहीं रखा जा सका है।

प्रदेश के बाकी इलाकों की तरह उन्नाव में किसान परेशान है। आलू किसान बुरी तरह बेबस हो गया है।जिले के कुछ आलू किसान खेत में ही आलू सड़ाने की कगार पर आ पहुचे हैं। जिला उद्यान विभाग के अधिकारियों की माने तो इस बार भी आलू उत्पादन एक रिकार्ड दर्ज करेगा। अधिकारियों के मुताबिक जिले में पिछले सीजन में एक लाख छह हजार 731 टन आलू की पैदावार हुई थी।

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इस बार पैदावार का लक्ष्य लगभग 176650 टन है। जिला उद्यान अधिकारी डा. शैलेंद्र शुक्ला ने बताया कि "लक्ष्य के सापेक्ष इस बार भी आलू का उत्पादन होगा।उन्नाव जिले में कुल कोल्डस्टोरेज की संख्या 18 है। इनकी भंडारण क्षमता 131075 मीट्रिक टन है। कुल उत्पादन का करीब 25 से 30 प्रतिशत आलू बाजार में बिक्री के लिए रहता है।

जनपद के बेहटा ससान गांव में रहने वाले आलू किसान विनोद शुक्ला बताते हैं, “हम कई साल से आलू की बुवाई करते आ रहे हैं पर इस बार आलू इतना सस्ती हो गया है कि हमें इस बात का डर है कि कहीं हमें अपनी फसल कोल्ड स्टोरेज में ही न छोड़नी पड़ जाए। अगर आलू और सस्ती हुई तो हो सकता फसल का मूल्य स्टोर के किराए से कम न हो जाए।"

वहीं पुरवा तहसील के केसरी खेड़ा में रहने वाले मुन्नू मास्टर बताते हैं कि "शुरू में आलू सस्ती हुई थी तो हमने सोचा था कि होली में हो सकता है कीमतों में कुछ उछाल आये पर हमारा यह अंदेशा भी गलत निकला अगर ऐसे ही चलता रहा तो हो सकता है आखिर में कुछ फसल तो खेत में ही सड़ जायेगी।

ज्ञातव्य हो की 8 मार्च को जिले के आलू किसान ने बचाओ यात्रा कर राजभवन में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर कहा था कि " जनपद में आलू की पैदावार अधिक होती है। किसान को आलू का वाजिब मूल्य नहीं मिल पाता।किसानों ने जनपद में आलू पर लगने वाला मंडी शुल्क समाप्त किया जाए।

सेंट्रल पोटैटो रिसर्च सेंटर से किसानों को उन्नतिशील आलू बीज उपलब्ध कराने व आलू का निर्यात करने के लिए विशेष व्यवस्था कराने की मांग की। इसके अलावा ज्ञापन में कहा गया कि जैविक विधि से आलू का उत्पादन कराए जाने के लिए कार्ययोजना बनाई जाए। आलू की सरकारी खरीद कराके राशन दुकानों के माध्यम से गरीबों को बटवाने की व्यवस्था की जाए।"

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