मिड-डे मील के साथ साथ किसानों के लिए मुसीबत बने बंदर  

मिड-डे मील के साथ साथ किसानों के लिए मुसीबत बने बंदर  प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में बंदरों का खौफ़।

विकास यादव,स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मेरठ। हस्तिनापुर विधानसभा का एक छोटे से गाँव मालीपुर में बंदरों का इतना ख़ौफ़ है कि प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे आराम से मिड-डे मील तक भी नहीं खा सकते। बंदर बच्चों से खाना छीन ले जाते हैं।

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मालीपुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक संदीप कुमार (49 वर्ष) बताते हैं, “इस गाँव में बंदरों का बहुत आतंक है। विद्यालय में आए दिन बंदर बच्चों पर हमला करते रहते हैं। कमरों में दरवाजे बंद करके बच्चों को मिड-डे मील खिलाते हैं। बच्चे विद्यालय परिसर में ही लगे हैंडपंप से पानी पीने में डरते हैं। एक साल पहले बंदरों ने दो बच्चों को बुरी तरह जख्मी भी कर दिया था। हमें बहुत परेशानी होती है।”

मालीपुर गाँव के रहने वाले आशुतोष यादव (51 वर्ष) बताते हैं, “हस्तिनापुर वन क्षेत्र से ये बंदर आए हैं। आज तक किसी ने भी इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया। हमने कई बार वन विभाग को सूचित भी किया, लेकिन कोई नहीं सुनता।

बंदरों से किसान भी परेशान हैं, जिस फसल से किसानों को आमदनी होती है वो उसी फसल को नहीं बो सकते।” इस क्षेत्र में एक मात्र आमदनी वाली फसल गन्ना है, लेकिन यहां के किसान संतराम (48 वर्ष) बताते हैं, “कई बार ऐसा हुआ है कि गन्ना बो कर घर जाते हैं और अगली सुबह देखते हैं तो खेत में बीज तक नहीं मिलता।

बंदरों के आतंक के चलते गाँव के कई किसानों ने गन्ना बोना छोड़ दिया है।” गाँव के वीर सिंह (58 वर्ष) बताते हैं, “गन्ने से ही लाभ होता है हमें, लेकिन बंदरों के प्रकोप की वजह से कई वर्षों से अपने खेतों में धान बोते आ रहे हैं। धान की फसल से और गन्ने की फसल से हुए मुनाफे की तुलना करें तो हमें धान की फसल में नुकसान होता है। गन्ने की फसल में फायदा होता है।”

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