किसान सीख रहे जैविक खेती के गुर

किसान सीख रहे जैविक खेती के गुरकिसानों को जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

दिवेन्द्र सिंह,स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। किसानों को जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसके लिए प्रदेश में 23 और देश भर में सौ प्रशिक्षण केन्द्र बनाए गए हैं।

लखनऊ जिला मुख्यालय से लगभग 25 किमी. दूर सरोजनी नगर ब्लॉक के मुल्लाहीखेड़ा गाँव में लखनऊ और मैनपुरी जिले के साठ किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित पंडित दीन दयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती का विशेष प्रशिक्षण राजधानी लखनऊ में दिया जा रहा है।

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मैनपुरी जिले के किसनी ब्लॉक के चतुरीपुर गाँव के किसान बलराम सिंह (50 वर्ष) लखनऊ में जैविक खेती का प्रशिक्षण लेने आए हैं। बलराम सिंह बताते हैं, “सरकार ने अच्छी योजना की शुरुआत की है, इसके जरिए हम लोगों को जैविक खेती जानकारी मिल रही है। मेरे साथ ही मैनपुरी जिले के और भी किसान प्रशिक्षण लेने आए हैं।”

लखनऊ में भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान को लखनऊ जोन की नोडल एजेंसी बनाया गया है। गन्ना अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार शाह बताते हैं, “गन्ना संस्थान को नोडल एजेंसी बनाया गया है, देश जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए ये योजना पिछले साल शुरू की गई थी। इसके तहत लखनऊ में इस प्रशिक्षण के लिए पहला शिविर भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में लगाया गया था।”

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को खेती की अधिक जानकारी देने के लिए जगह-जगह ले जाया जाता हैं। जहां उन्हें प्राकृतिक खेती के सफल परिणाम दिखाए जाते हैं। किसानों को प्रेरित किया जाता है कि वे गोबर गैस, गोबर खाद, गोमूत्र, सोलर ऊर्जा का उपयोग अपनी खेती में करें। इससे वे अधिक और बेहतर उत्पादन कर अच्छा मुनाफा कर सकते हैं।

पूरे देश में इस प्रकार के 100 केन्द्रों पर किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनमें से उत्तर प्रदेश में 23 केन्द्र शुरु किये गए हैं। लखनऊ के सरोजनी नगर के मुल्लाहीखेड़ा गाँव में माडल बायोगैस समूह पर किसानों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण की शुरुआत हो गयी है।

केन्द्र के प्रभारी सुरेन्द्र सिंह बताते हैं, “प्रशिक्षण के लिए आए किसानों के ठहरने, खाने-पीने और आने-जाने का किराया भी सरकार की तरफ से दिया जाता है। इसके साथ ही किसानों को बायो गैस संयत्र लगाने के लिए विभाग से मिलने वाली सब्सिडी से संबंधित सभी तरह की जानकारी दी जा रही है।”

पांच दिन तक चलेगा प्रशिक्षण

आज से शुरु हुए प्रशिक्षण पांच दिनों तक चलेगा, इसके बाद पांच दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिसमें हमीरपुर, बाराबंकी, फिरोजाबाद, अमरोहा के किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही किसानों को बाराबंकी के बबुरिया गाँव में जैविक खेती का भ्रमण भी कराया जाएगा।

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