किसान निजी दुकानों से खरीद रहे बीज व खाद 

किसान निजी दुकानों से खरीद रहे बीज व खाद तालों में जमी धूल, दरवाजों और खिड़की पर लगा जाला।

अजय मिश्र, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कन्नौज। तालों में जमी धूल, दरवाजों और खिड़की पर लगा जाला। छत पर भी जाले में दिखती बड़ी-बड़ी मकड़ियां। यह हाल है कन्नौज जिला मुख्यालय से करीब 11 किमी दूर स्थित फगुहा साधन सहकारी समिति का।

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यहां से मिलने वाली सुविधाओं से किसान वंचित हैं। अफसर भी प्रयास नहीं करते हैं कि समिति जल्द से जल्द शुरू की जाए। गाँव के ही सुवेंद्र सिंह (50 वर्ष) बताते हैं, ‘‘करीब दो महीने से यहां कोई भी झांकने नहीं आया। देवा गाँव में चल रही समिति के सचिव के पास यहां का चार्ज है। पहले यहां के सचिव रामलखन थे, जो मर चुके हैं। यहां धांधली भी हुई थी, जिसकी रिपोर्ट भी दर्ज की जा चुकी है। समिति बंद रहने से किसान निजी दुकानों से खाद और बीज खरीदते हैं।”

इसी तरह उमर्दा ब्लॉक क्षेत्र के बलनपुर गाँव में स्थित साधन सहकारी समिति भी प्रतिदिन नहीं खुलती है। यहां पर भी गंदगी दिखती है। आस-पास के किसान परेशान होते हैं। उमर्दा की ही गाँव बनियनपुर्वा में चल रही बस्ता गाँव की साधन सहकारी समिति खुली मिली।

सचिव नरेश बाबू कहते हैं, “समिति पर 168 किसान पंजीकृत हैं। जिनको लोन व चेक पर कृषि बीज और खाद मुहैया कराई जाती है। समय से लेन-देन करने वाले किसानों को ही लाभ मिलता है। फसल बीमा योजना का भी लाभ दिलाने का प्रयास होता है। इस समय लोन वसूली का काम चल रहा है। वह बताते हैं कि ठठिया, खामा, पट्टी और उमर्दा आदि में भी समितियां चल रही हैं।”

फगुहा की साधन सहकारी समिति के सचिव ने समय पर बैलेंस शीट नहीं बनाई। ऑडिट भी नहीं हो पाया, इसलिए काम नहीं हो रहा है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि ऑडिट कराएं और पैसा जमा कर खाद उठाएं।
संतोष सिंह यादव, एआर को-आपरेटिव, कन्नौज

जिले में हैं 48 समितियां

वीवीआईपी जिले के आठ ब्लॉक क्षेत्रों में 48 साधन सहकारी समितियां चल रही हैं। इनमें हजारों किसान जुड़े हुए हैं। कई जगह समितियां समय पर तो कई जगह हर रोज न खुलने की शिकायत किसान करते हैं। साधन सहकारी समिति फगुहा-कन्नौज के अध्यक्ष श्याम सिंह बघेल कहते हैं, ‘‘समिति में करीब 300 किसान जुड़े हैं। समिति बंद रहने से किसान भटकते हैं। उनसे पहले के समय में यहां गबन भी हो चुका है। पूर्व में सचिव का निधन भी हो चुका है। फगुहा की समिति को शुरू कराने के लिए हम प्रयास भी कर चुके हैं।”

इस बार नहीं आया बीज

बस्ता की साधन सहकारी समिति पर किसानों के लिए गेहूं का बीज नहीं आया। इस बाबत सचिव का तर्क है कि वह डिमांड के हिसाब से बीज मंगाते हैं। रखा हुआ बीज चूहे खा जाते हैं। उनको तो पैसा देना ही पड़ता है। वह आगे कहते हैं कि एक एकड़ यानी पांच बीघा जमीन पर 18 हजार की खाद यहां से किसानों को दी जाती है।

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