खेती के साथ पापुलर लगाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे किसान

खेती के साथ पापुलर लगाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे किसानफसल के साथ पापुलर लगा रहे किसान 

गजेन्द्र गर्ग

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

मेरठ। मेरठ में किसान खेती के साथ पापुलर के वृक्ष लगाकर सामाजिक वानिकी की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। जिसके चलते खेती के साथ-साथ पापुलर बेचकर अच्छा मुनाफा मिल रहा हैं। कृषि विवि भी इस ओर कदम बढा रहा है। विवि अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पापुलर की उत्तम माने जाने वाली किस्म जी 48 की पौध तैयार की जा रही है। जिन्हें सैंपल के रूप में किसानों को दिया जाएगा।

माछरा ब्लाक के गाँव रछौती निवासी सतवीर सिंह (44 वर्ष) बताते हैं, “पांच साल पहले एक एकड़ जमीन में पापुलर का बाग लगाया था। हर वर्ष उसी जमीन से गेहूं, ज्वार सहित अन्य फसल भी ले रहे हैं।साथ ही इस वर्ष करीब 9 लाख रुपए का मुनाफा पापुलर बेचकर कमाया है।”

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गाँव हसनपुर निवासी राकेश (34वर्ष) बताते हैं, “यदि तकनीकि विधि द्वारा पापुलर की खेती की जाए और रेट ठीक रहने पर बेचा जाए, तो अच्छा मुनाफा मिल जाता है।” मेरठ ब्लाक के गाँव पूठा निवासी चेतराम (48वर्ष) बताते हैं, “यदि सयंम से काम लिया जाए, तो पापुलर से अच्छा-खासा मुनाफा कमाया जा सकता है।”

कृषि वैज्ञानिक नेत्रपाल सिंह का मानना है,“ किसान इस वृक्ष को तकनीकी ज्ञान के बिना ही उगा रहे हैं। इससे पेड़ को औने-पौने दामों में बेचना पड़ता है। इसका प्रबंधन दिसंबर व जनवरी माह में कलम लगाकर किया जाता है। कलम एक वर्ष वाले स्वस्थ पौधे से लेनी चाहिए। एक साल पुराने पेड़ से 20-25 सेमी लंबी टहनियां काटकर खेत की क्यारियां में रोपनी चाहिए। ”

स्वस्थ पेड़ पैदावार के उपाय

नर्सरी में लगाने से पहले मैंकोजेब नामक फंफूद नाशक तीन ग्राम दवा प्रति लीटर की दर से मिलाकर पौध को उपचारित करना जरूरी है। नर्सरी क्षेत्र को दीमक से बचाने को क्लोरोपायरीफास दवा तीन मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर ट्रेचिंग करना जरूरी है। यदि तीन चार साल खेत में अन्य फसलें लेनी है तो पौध के बीच की दूरी पांच बाई पांच मीटर रखी जाएं। पापुलर में तना बेधक कीट बहुत अधिक लगता है। तना बेधक कीट के लिए रुई का छोटा सा टुकड़ा मिट्टी के तेल में भिगोकर उसे छेद में डाल दें व छेद बंद कर दें।

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कृषि विवि के सहायक निदेशक डा. विपिन बताते हैं,“ पापुलर का पेड़ छह साल में तैयार होता है। अभी कृषि विवि में पापुलर की पौध तैयार की जा रही है। दो साल बाद किसानों को पौध उपलब्ध करा दीजाएगी। प्रथम वर्ष में किसानों को तने के नीचे तीन मीटर के हिस्से तक फूटे कल्ले आरी से काट देने चाहिए। जो पौधे मर गए हों उनके स्थान पर जनवरी में नए पौधे लगा दें। पहले साल में डीएपी 25 ग्रामए पोटाश 15 ग्राम व गोबर की खाद डालनी चाहिए। दूसरे वर्ष के जनवरी माह में बढ़वार के साथ फूटने वाली अन्य टहनियों को आरी से मिलाकर काट दें।

प्रत्येक साल खाद की खुराक दो गुनी कर दी जाएं। तीसरे वर्ष में जनवरी माह में दूसरे वर्ष की प्रक्रिया को दोहराना चाहिए। चौथे वर्ष.मई व अगस्त में दो बार निराई व सूखे मौसम में तीन बार सिंचाई करनी जरूरी है। पंचम व छठे वर्ष के जनवरी माह में तने के निचले एक तिहाई हिस्से से सभी टहनियों को आरी से काट देना चाहिए।”

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जिला कृषि अधिकारी जसवीर तेवतिया बताते हैं,“ सामाजिक वानीकी के लिए पापुलर उपयुक्त साबित हो रहा है। सहारनपुर में तो लगभग हर किसान ने पापुलर का बाग लगाया है, लेकिन मेरठ में कुछगांवों के लोगों ने अभी शुरू किया है। यदि लोगों को जागरूक किया जाए, तो यह किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।”

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