उधारी की खेती कर रहे किसान

उधारी की खेती कर रहे किसानकिसानों के गन्ने का मूल्य सरकार तय करती है और पैसा देने का दिन मिल प्रबंधन तय करता है।

बसंत कुमार

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मेरठ। शरीर कंपाने वाली ठंड के बावजूद सुबह सात बजे सिहखेड़ा के रहने वाले 40 वर्षीय मनोज बुग्गी से गन्ना लेकर चीनी मिल जा रहे हैं। ठंड में गन्ना काटने, उसे साफ़ करने और साफ करके मिल तक ले जाने के बावजूद मनोज को पैसा कब मिलेगा उसे नहीं मालूम है। किसानों के गन्ने का मूल्य सरकार तय करती है और पैसा देने का दिन मिल प्रबंधन तय करता है।

मेरठ के हस्तिनापुर के मवाना में बने मवाना सुगर वर्क्स में रोजाना गन्ना लेकर पहुंचने वाले सैकड़ों किसान मनोज की तरह परेशान हैं। चीनी मिल किसानों को समय पर पैसा नहीं दे रहा है। कुनकुरा गाँव के रहने वाले 40 वर्षीय संजीव बताते हैं “किसान चीनी मिल ने 2016 के अप्रैल से नवंबर तक के पैसे 13 जनवरी को दिए हैं, लेकिन नवंबर के बाद से अब तक के पैसे मिल ने नहीं दिए”।

मवाना में बने मवाना सुगर वर्क्स एक निजी कंपनी है| जहां पर आसपास के लगभग 55 से 60 गाँव के किसान यहां अपना गन्ना लेकर आते हैं। रानी नगला के रहने वाले बलराम सरकार और मिल मालिक पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहते हैं, “बैंक से जब हम कर्ज लेकर खेती करते हैं तो बैंक एक-एक दिन का ब्याज जोड़ता है, लेकिन हमारा पैसा मिल मालिक चाहे जितना दिन रखे हमें एक रुपए ब्याज का नहीं मिलता है| पहले नियम था कि गन्ना जमा करने के 14 दिन बाद अगर मिल पैसे नहीं देगा तो उसे ब्याज देना होता था लेकिन प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों यह ख़त्म कर दिया। अब मिल चाहे जितने दिन बाद पैसा देना चाहे दे सकते है।”

सिहखेड़ा के रहने वाले जगवीर सिंह कहते हैं “हम क़र्ज लेकर गन्ना बोते हैं। एक साल तक खेत में रखने के बाद गन्ने का मूल्य सरकार तय करती है और गन्ने का पैसा कब मिलेगा यह मिल मालिक तय करते हैं। हम बस खेत में मेहनत करते हैं। खेती में मुनाफा बिल्कुल नहीं हो रहा है। क़र्ज लेकर खेती करते हैं और कमाकर क़र्ज चुकाते हैं।” मवाना सुगर वर्क्स के मुख्य प्रबन्धक संजीव बालियान बताते हैं “हमने पिछले साल का बकाया किसानों को वापस कर दिया है| इस सीजन का पैसा भी हम धीरे-धीरे किसानों को दे रहे हैं|”

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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