गुणवत्तायुक्त बीजों पर किसान दर्ज कराएं अपना अधिकार

गुणवत्तायुक्त बीजों पर किसान दर्ज कराएं अपना अधिकारकिसानों को उनके द्वारा कई वर्षों से संरक्षित और प्रयोग किए जाने वाले बीजों पर मालिकाना हक मिल सकता है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

सीतापुर। परंपरागत खेती कर रहे किसानों को उनके द्वारा कई वर्षों से संरक्षित और प्रयोग किए जाने वाले बीजों पर मालिकाना हक मिल सकता है। सीतापुर जिले में पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण,नई दिल्ली के सहयोग से कृषि विज्ञान केन्द्र कटिया सीतापुर कृषकों को उनके गुणवत्तायुक्त

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बीजों पर मालिकाना अधिकार दिलवाने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर कृषकों को जगह-जगह जागरूक किया जा रहा है।

कार्यक्रम में केवीके, कटिया के अध्यक्ष डॉ. आनन्द सिंह ने किसानों को जागरूक करते हुए बताया, ‘’जनपद सीतापुर में परंपरागत फसलों के बीजों का बहुत बड़ा भंडार है,लेकिन धीरे-धीरे उसके महत्व को न जानकर व हाइब्रिड फसलों के चलन से बेशकीमती बीज समाप्त होते जा रहे हैं।’’ उन्होंने आगे बताया कि जिन किसानों के पास परंपरागत बीज उप्लब्ध हैं, वो किसान उन बीजों पर अपना मालिकाना हक प्राप्त करने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण में अपना आवेदन कर सकते हैं। इसी क्रम में विकास खण्ड बिसवां के ग्राम ओरीपुर, घूरीपुर, पड़रिया में कृषक अधिकार संरक्षण पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कृषि विज्ञान केन्द्र पर फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. डीएस श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले वर्ष जनपद सीतापुर से 176 प्रकार के पारम्परिक बीज (अनाजवर्गीय, दलहन, तिलहन, फल सब्जी, औषधीय एवं सुगन्धित पौधों) पर अपना मालिकाना हक प्राप्त करने हेतु किसानों ने आवेदन किया है। जिले में दलहन एवं तिलहन वर्गीय फसलों के कई प्रकार की बीज उपलब्ध हैं। अगर उनकों समय रहते पहचान लिया गया,तो जनपद सीतापुर को जैव विविधता संरक्षण में अग्रणी गिना जाएगा।

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