बहराइच में समूह बनाकर महिलाएं कर रहीं खेती

बहराइच में समूह बनाकर महिलाएं कर रहीं खेतीगाँवों की महिलाएं समूह बनाकर करती हैं खेती।

बहराइच। कुछ साल पहले तक जो महिलाएं दूसरों के खेतों में मजदूरी करती थीं, आज वही महिलाएं बचत के पैसे से समूह बनाकर खेती कर रही हैं। अनाज बेचकर जो बचत होती है उसे खर्च करने के बजाय बैंक में जमा कर रही हैं।

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बहराइच जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर सिमरिया गाँव की महिलाएं अब समूह बनाकर खेती करती हैं। इस गाँव में रहने वाली नजमा (35 वर्ष) खुश होकर बताती हैं, “हम पंचों ने मिलकर जब से खेती करनी शुरू की है तबसे बड़ी मजबूती लगती है, लागत निकालकर 30 हजार रुपए बैंक में जमा कर दिए हैं, जरूरत के समय हमें किसी से पैसे मांगने नहीं पड़ेंगे।”

नजमा के पास अपने खुद के खेत नहीं हैं, समूह में महिलाओं ने मिलकर पहले 20-30 रुपए महीने में बचत करनी वर्ष 2010 में शुरू की। 20 महिलाओं ने अपने समूह का नाम ‘चमेली स्वयं सहायता’ रखा।

हम पाचों ने मिलकर जब से खेती करनी शुरू की है तबसे बड़ी मजबूती लगती है, लागत निकालकर 30 हजार रुपए बैंक में जमा कर दिए हैं, जरूरत के समय हमें किसी से पैसे मांगने नहीं पड़ेंगे।
नजमा, सिमरिया गाँव, बहराइच

इस समूह की महिला राजकुमारी (49 वर्ष) अपना अनुभव बताती है, “गाँव के एक आदमी को 20 हजार रुपए की जरूरत थी तो उसने अपना दो बीघा खेत हमारे पास रख दिया, हम महिलाओं ने अपने बचत के पैसे से उसे 20 हजार रुपए दे दिये।” वो आगे बताती हैं, “उस खेत में ज्यादा कुछ पैदा नहीं होता था, हम 20 महिलाओं ने मिलकर उस खेत को पूरा साफ किया,गोबर की खाद कई बार डाली, पिछले दो वर्षों से अच्छी पैदावार हो रही है।”

कई गाँव की महिलाएं आपस में सामूहिक खेती करके आत्मनिर्भर बन रही हैं। सिमरिया गाँव की शायरा बताती हैं , “हमारे समूह में हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों की महिलाएं आपस में न सिर्फ खेती करती हैं बल्कि जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की मदद भी करती हैं।”

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