फसल सुरक्षा: कीटनाशकों के प्रयोग के बिना भी मिल सकता है कीट-पतंगों से छुटकारा 

फसल सुरक्षा: कीटनाशकों के प्रयोग के बिना भी मिल सकता है कीट-पतंगों से छुटकारा किसान अब ट्रैप का प्रयोग कर कीटनाशक से छुटकारा पा सकते हैं।

प्रशांत श्रीवास्तव, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

बहराइच (यूपी)। बदलते मौसम के साथ फसलों में कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है, इसकी रोकथाम के लिए किसान कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं, लेकिन किसान अब ट्रैप का प्रयोग कर इनसे छुटकारा पा सकते हैं।

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बहराइच कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. रोहित पांडेय इसके बारे में बताते हैं, “आज उत्पादन के साथ फसलों की गुणवत्ता बरकरार रखना सबसे चुनौतीपूर्ण हो गया है। फसलों में आज दलहन व सब्जियां कीड़े के प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सूड़ी कीड़ा चना, अरहर, गोभी, टमाटर आदि की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है, जिससे उनकी गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों प्रभावित होती है।’’

दलहनी फसलों में हेलिकोवेरपा आर्मिगेरा (कटुआ कीट) कीड़ा सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। अरहर जो बहराइच के साथ पूरब की सबसे लोकप्रिय फसल है इसमें लागत कम उत्पादन ज्यादा है, लेकिन यह कीड़े उत्पादन को नुकसान पहुंचा रहे हैं इस कीड़े का पतंगा पत्तियों पर अंडे देता है। अंडे 8-10 दिन में फूटते हैं और उनसे प्रथम चरण का लार्वा (सूड़ी) निकलता हैं, ये लार्वा पहले पत्तियों को नुकसान पहुंचाता है फिर कुछ दिन बाद बड़ा होकर ये फलियों में घुसकर दानों को खा लेता है।

वैज्ञानिक ने आगे बताया, ‘’मादा पतंगा में एक ग्रंथि होती है, जिससे एक प्रकार का हार्मोन निकलता है जो कि नर पतंगा को अपनी ओर आकर्षित करता है, वैज्ञानिकों ने इस पर नियंत्रण के लिए प्रयोगशाला में उसी हार्मोन ल्योर को बनाया जिसे जालीनुमा ट्रैप में लगा देते हैं।

देखने पर सूड़ी का आधा भाग फल के अंदर आधा फल के बाहर घुमावदार अवस्था में लटकता हुआ देख सकते हैं जो इसकी पहचान होती है। कीटनाशक का प्रयोग न करने के स्थित में फसल 40 फीसदी तक चौपट हो जाती है फैजाबाद के हरदोईया गाँव में इस कीड़े ने 100 फीसदी तक फसलों को नष्ट कर दिया था।
डॉ. रोहित पांडेय, कृषि वैज्ञानिक

नर पतंगा उस ल्योर को मादा पतंगा से निकलने वाला आकर्षण हार्मोन समझकर उस में फंस जाता है, इसके बाद में निकाल कर मार दिया जाता है। इससे प्रजनन प्रक्रिया नहीं हो पाती और एक या दो पीढ़ी के बाद इस कीड़े की प्रजाति का अंत हो जाता है।

क्या हैं इससे फायदे

इसमें 100 फीसदी तक कीड़े मर जाते हैं और इसका स्वास्थ्य या पर्यावरण पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता है। पेस्टीसाइड काफी महंगे होते हैं ये काफी सस्ता होता है जहां ये ट्रैप लगा होता है उसके आसपास के खेतों के कीड़े भी इसमें आकर फंस जाते हैं, जिससे दूसरे किसानों को भी इसका फायदा मिल जाता है।

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