आठवीं से ज्यादा नहीं पढ़ पाती वीरमपुर गाँव की छात्राएं

Ashwani DwivediAshwani Dwivedi   14 May 2017 7:53 PM GMT

आठवीं से ज्यादा नहीं पढ़ पाती वीरमपुर गाँव की छात्राएंगाँव कनेक्शन के कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थी व परिजन।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी 70 से 80 फीसदी लड़कियां उच्च शिक्षा से वंचित हैं। शायद इसकी मुख्य वजह आर्थिक तंगी और स्कूलों का दूर होना ही है। जनपद मुख्यालय से महज 18 किमी दूर चिनहट ब्लॉक के अंतर्गत बसे गाँव वीरमपुर की आबादी लगभग 2500 है। इस गाँव की लड़कियां कक्षा आठ से आगे की शिक्षा से आज भी वंचित हैं। बहुत हद तक आस-पास के गाँवों का भी यही हाल सामने आया है।

गाँव कनेक्शन के कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थी व ग्रामीण महिलाएं।

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गाँव कनेक्शन द्वारा “बने अपने गाँव की आवाज” कार्यक्रम के तहत हाल ही में चिनहट के वीरमपुर गाँव पहुंचने पर पता चला कि यहां मात्र एक प्राथमिक स्कूल है। जबकि वहां भी पढ़ाई का स्तर सही नहीं है। वहीं पड़ोसी गाँव में एक माध्यमिक स्कूल है। इस क्षेत्र के अधिकांश लड़कियों की पढ़ाई यहीं आकर रूक जाती हैं। इस बाबत वीरमपुर गाँव निवासी लीलावती (50वर्ष) कहती हैं, “हम पढ़ाई नहीं कर सके, लेकिन हम चाहते हैं कि हमारी बिटिया पढ़ लिख जाए। हालांकि गाँव में प्राथमिक स्कूल ही है, जिससे ये ईच्छा भी पूरी नहीं हो पाती। गरीबी के चलते घर के सभी बच्चों को बाहर या दूर रखकर पढ़ाया भी नहीं जा सकता। शायद भगवान ने इनके भाग्य में यहीं तक पढ़ना लिखना लिखा है।”

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गाँव के ही राम बालक निषाद कहते हैं, “हमारे यहा इतनी बड़ी आबादी में सिर्फ दो तीन लड़किया ही बारहवीं तक पढ़ी हैं। घर से करीब 15 किमी दूर इंटर कालेज है। इतनी दूर सयानी लड़कियों को कैसे भेजें।” वहीं गाँव की सीमा, अनुष्का, दीपा और नीतू जैसी तमाम लड़कियां आगे की पढ़ाई करना चाहती हैं, लेकिन हालात के आगे मजबूर हैं। वे चाहकर भी आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं।

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