बार-बार बदलता रहा कस्तूरबा विद्यालयों के शिक्षकों का मानदेय

बार-बार बदलता रहा कस्तूरबा विद्यालयों के शिक्षकों का मानदेयकस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन बदलता रहा।

सुशील सिंह, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

सुल्तानपुर। प्रदेश में गरीब लड़कियों को बेहतर शिक्षा देने के लिए चल रहे कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालयों में संविदा पर काम कर रहे शिक्षकों का वेतन सरकार बदलने के साथ बदलता रहा।

लम्भुआ कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के संविदा अध्यापक राजेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं, “पिछली सरकार से हम लोगों को न्याय नहीं मिला था। एक ही पद पर दो तरह का वेतन दिया जाता रहा है।” बता दें कि उत्तर प्रदेश में 746 आवासीय कस्तूरबा गांधी में 2200 पार्ट टाइम शिक्षक और शिक्षिकाएं हैं और फुलटाइम 2800 शिक्षक हैं। इस विद्यालय के बारे में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने भाषण में प्रशंसा कर चुके हैं।

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देश में और जगह इस तरह का मानदेय नहीं है। हरियाणा, असम, आंध्र प्रदेश में प्राइवेट शिक्षकों का मानदेय बढ़ाया गया हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में हम लोगों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा हैं। अब हमें योगी सरकार से पूरी उम्मीद है कि शिक्षकों का मानदेय एक निर्धारित होगा।”
अतुल बंसल, प्रदेश अध्यक्ष , कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय

अगर मानदेय पर गौर करें तो वार्डन कम शिक्षिका का मानदेय 2008 में 11,000 था और 2014 में 26,000 हुआ। इनके मानदेय में 127 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जबकि फुल टाइम का 9200 से 20,000 ग्रोथ 117 प्रतिशत है। पार्ट टाइम उर्दू अध्यापकों का 7200 से 12000 हो गया, जबकि हिंदी और सभी विषय के पार्ट टाइम के मानदेय 7200 से 5000 हो गया। चपरासी का वेतन 3200 से 5000 हुआ। ऐसे में विद्यालय के शिक्षकों का मानदेय बार-बार बदलता रहा। एक ही पद में दो तरह का वेतन पुरानी सरकार में था। मगर अब प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी के सरकार बनने के बाद पार्ट टाइम टीचरों में बहुत ही उम्मीद जगी है।

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