यूपी के केला किसान नहीं उठा पा रहे फायदा, बिक्री की सही व्यवस्था न होना बन रही बाधा

Devanshu Mani TiwariDevanshu Mani Tiwari   20 Jan 2017 3:23 PM GMT

यूपी के केला किसान नहीं उठा पा रहे फायदा, बिक्री की सही व्यवस्था न होना बन रही बाधाम‍‍ंडियों में बेचने के लिए केला लेकर जाते किसान। फोटो: गाँव कनेक्शन

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में केले की खेती पिछले दो वर्षों में गन्ने के बाद दूसरी बड़ी नकदी फसल के रूप में उभरी है। प्रदेश सरकार ने भी खासतौर पर टिश्यू कल्चर तकनीक की मदद से केले की खेती को बढ़ावा दिया है, लेकिन अभी भी उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में केले की खरीद व बिक्री के लिए कोई सरकारी ढांचागत व्यवस्था नहीं बन पाई है। इस वजह से लाभकारी खेती होने के बावजूद भी किसान इससे मुंह मोड़ रहे हैं।

पहले हम तीन एकड़ में केले की खेती करते थे, जिसमें हमें 800 कुंतल केला आसानी से मिल जाता था। केला कितना भी अच्छा हो पर मंडी में आढ़ति को उसका सात से आठ फीसदी देना ही पड़ता था इसलिए अब केला नहीं उगाते हैं।
फखरूद्दीन (40 वर्ष), किसान, अटेसुआ गाँव

उत्तरप्रदेश की मंडियों में केले की बिक्री व इनकी खपत को बेहतर करने के लिए उत्तर प्रदेश कृषि विदेश व्यापार एवं विपणन इकाई के सह निदेशक डॉ. दिनेश चंद्र बताते हैं, ‘पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में केले की डिमांड में जबर्दस्त बढ़ोतरी देखी गई है। मंडी में भी इसकी अच्छी खरीद हो रही है पर अभी विशेष रूप से केले की बिक्री व खरीद के लिए मंडियों में कोई नई व्यवस्था लागू नहीं की गई है। मौजूदा समय में केला अन्य बागवानी फसलों की तरह ही फल मंडी में बिकता है।’

प्रदेश में केला किसानों के लिए बेहतर ढांचाकृत व्यवस्था तैयार किए जाने की बात कहते हुए डॉ. दिनेश चंद्र बताते हैं, ‘किसान बड़े व्यापारियों को कच्चा केला कम दामों पर देते हैं और वही केला बाद में पकाकर अच्छे दामों पर बेचा जाता है। अगर मंडियों में बनाना रिपनिंग चैंबर व स्टोरेज यूनिट बनाई जाएं, जिसमें किसान उपज को तुरंत पकाकर वहीं बेच सकें, तो उन्हें केले के अच्छे दाम मिल सकते हैं। केले की फसल की खरीद ना हो पाने के कारण परेशान लखीमपुर जिले के किसान राजकिशोर वर्मा बताते हैं कि हम केले में बहुत मेहनत करते हैं लेकिन यहां मंडी ना होना एक बड़ी समस्या है। सरकार गेहूं, धान के लिए ग्रीन कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाएं चलाती है पर केला किसानों के लिए ऐसी कोई भी योजना नहीं है।

फसल के उचित मूल्य के लिए दूसरे विकल्प ढूंढ रहे किसान

इसके बाद भी इसकी बिक्री के लिए कोई विशेष रूप से व्यवस्था न होने की वजह से किसान दूसरे विकल्प ढूंढ रहे हैं। बाराबंकी जिले के रमपुरवा गाँव में करीब 24 एकड़ क्षेत्र में केले की खेती कर रहे जिले के बड़े किसान हरीश वर्मा इस वर्ष अपने केले की फसल से बहुत खुश हैं पर वो अपनी फसल का 75 प्रतिशत हिस्सा अपने प्रदेश में ना बेचकर दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के बड़े व्यापारियों को बेच रहे हैं।

इस बारे में हरीश बताते हैं, ‘यहां के केला किसानों की दो मुख्य समस्याएं हैं- पहला यह कि यहां पर मंडी में अपना केला ले जाने से पहले जगह-जगह बनी पुलिस चौकियों पर किसानों को पैसा देना पड़ता है और दूसरा यह कि अन्य राज्यों की तुलना में यहां कम रेट भी मिलता है।’

विश्व में सबसे अधिक केले की खेती भारत में

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, भारत सरकार की वार्षिक रिपोर्ट 2013-14 के मुताबिक पूरे विश्व में दस लाख हज़ार टन से ज्य़ादा केले का उत्पादन होता है जिसमें करीब 29,735 हज़ार टन केला अकेले भारत में उगाया जाता है जो विश्व में सबसे अधिक है। ऐसे में सरकार अगर इसकी खरीद की व्यवस्थाओं को ठीक करे तो छोटे किसानों को भी अधिक लाभ मिल सकता है।

तमिलनाडु और ओडिसा में जल्दी मिलता है भुगतान

कृषि मंत्रालय से जारी पोस्ट हार्वेस्ट प्रोफाइल (केला) रिपोर्ट, 2015 यह बताती है कि केले की फसल कटाई के बाद तमिलनाडु और ओडिसा राज्यों में खरीद व बिक्री के लिए सबसे अच्छी ढांचाकृत व्यवस्थाएं हैं। तमिलनाडु में केले की फसल कटाई के बाद सबसे जल्दी (10 दिनों) के भीतर फसल का उचित मूल्य मिल जाता है। इसके लिए राज्य में अधिकतर मंडियों कोल्ड स्टोर यूनिट बनाए गए हैं, जहां केला ज़्यादा दिनों तक स्टोर करके रखा जा सकता है। वहीं ओडिसा में फसल कटाई के बाद किसान 24 घंटे के भीतर ही अपनी फसल को सीधे तौर पर खुदरा विक्रेताओं को बेचते हैं।

भारत में केला उत्पादन में वर्तमान समय में तमिलनाडु, केरल व कर्नाटक जैसे दक्षिण भारतीय राज्य अभी भी आगे हैं पर मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश में 38 हज़ार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में केले की खेती हो रही है, जो कि पूरे उत्तर भारत में सबसे ज़्यादा है। इसके अलावा यहां की मंडियों में उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों से भी केला आता है।

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