ग्रामीणों ने अब तक नहीं देखी बिजली की रोशनी 

ग्रामीणों ने अब तक नहीं देखी बिजली की रोशनी लखनऊ में एक ऐसा गाँव है जहां आजादी के बाद से अब तक गाँव के लोगों ने बिजली की रोशनी नहीं देखी

अश्वनी द्विवेदी, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। लखनऊ में एक ऐसा गाँव है जहां आजादी के बाद से अब तक गाँव के लोगों ने बिजली की रोशनी नहीं देखी। इस गाँव तक जाने के लिए न तो पक्की सड़क है न ही इस गाँव के लोगों के पास बुनियादी सुविधाएं पहुंच पाई हैं।

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लखनऊ जनपद मुख्यालय से 30 किमी की दूरी पर बीकेटी तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मुसपीपरी का मजरा रामनगर आज भी बुनियादी सुविधाओं से मरहूम है। गाँव कनेक्शन की टीम ने जब इस गाँव का दौरा किया तो सबसे पहले इस गाँव के निवासी अम्बिका (40 वर्ष) से जब गाँव की समस्याओं पर बात शुरू की तो धीरे-धीरे और लोग एकत्र हो गए।

चर्चा के दौरान पता चला कि करीब 120 वर्ष पहले पूर्वांचल और बिहार के कुछ परिवार गरीबी से तंग आकर रोजी-रोटी की तलाश में यहां आये थे। कई पीढ़ियों से यहीं रह रहे हैं और फिर यहीं के होकर रह गए। ये लोग सरकारी दस्तावेजों में यहां के नागरिक हैं और मतदान भी करते हैं। अम्बिका बताते हैं, “नेता यहां सिर्फ पांच वर्ष में एक बार चुनाव के समय आते हैं। उसके अलावा कोई अधिकारी कभी गाँव नहीं आया। कहने को तो ये गाँव मुसपीपरी ग्राम पंचायत का हिस्सा है, लेकिन बाहरी होने के ठप्पे के कारण किसी भी प्रधान ने यहां पर विकास कार्य कराने में रुचि नहीं ली।”

पंचायत में 12 मजरे और करीब 3000 की आबादी है। बीपीएल कार्ड 80 फीसदी लोगों के बनने थे, लेकिन अभी 40 फीसदी लोगों के ही बने हैं। जैसे ही लिमिट बढ़ेगी और पात्र लोगों को इसमें शामिल किया जाएगा। मुसपीपरी का कोटा अभी निलंबित चल रहा है और गोधना से सम्बंध है, जिसके चलते लोगों को राशन की दिक्कत हो रही है।
अमित बाजपेई, ग्राम प्रधान मुसपीपरी

खम्भे और तार लगे पर नहीं पहुंची बिजली

इस गाँव की निवासी गीता (38 वर्ष) ने बताया, “अखिलेश सरकार की कृपा से यहां पता नहीं कैसे खम्भे और तार तो लग गए हैं पर अब तक बिजली नहीं आयी। कई पीढ़ियां रोशनी की राह देखत-देखते खत्म हो गईं पर बिजली नहीं आयी।” वह आगे बताती हैं, “हमारे पास जमीन तो है नहीं घर के नाम पर सिर्फ यही मड़ैया है, लेकिन तब भी हमारा बीपीएल कार्ड नहीं है। मनरेगा के तहत काम मांगने गए थे पर काम नहीं मिला। प्रधान मुंह देखकर काम करता है। हम किसी तरह मजदूरी करके घर का खर्च चला रहे हैं। जिस दिन काम न मिले उस दिन बच्चे भूखे सोते हैं।”

रामनगर का काम पहले ज्योति कंपनी को दिया गया था पर सही काम न करने के कारण इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है और वहां पर विद्युतीकरण का कार्य वीआई कंपनी को दिया गया है। काम चल रहा है लगभग एक माह में राम नगर गाँव में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य है।
रामप्रकाश, अधिशाषी अभियंता बीकेटी

इसी गाँव के रामबचन (70 वर्ष) ने बताया, “हमारे गाँव में किसी को मनरेगा के तहत काम नहीं मिला है। बीपीएल कार्ड तो है पर डेढ़ साल से राशन नहीं मिला।” गाँव की ही मीना मौर्य (50 वर्ष) बताती हैं, “हमारे पास न तो जमीन है न गृहस्थी। हम लोगों को न मिट्टी का तेल मिलता है न राशन। कार्ड है तो क्या कार्ड खा लें। गाँव के ही राजू मौर्य (25 वर्ष) कहते हैं, “गाँव में जाने के लिए ख़ाली एक पगडंडी है। बरसात में बच्चों का स्कूल जाने में बड़ी तकलीफ होती है। शादी-ब्याह में बहन-बेटियां आती हैं तो गाँव तो एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।”

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