आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है काजल

आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है काजलफोटो: इंटरनेट

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कन्नौज। ‘‘गांव में अब भी बच्चों के काजल लगाने की परंपरा है। यह आंखों के लिए नुकसानदेय है। कार्बन और सरसों के तेल से काजल बनता है जो आंखों के अंदर लगाने से विपरीत प्रभाव डालता है।‘‘ यह बात आई सर्जन डाॅ. जेजे राम ने कही।

वह आगे बताते हैं कि कुछ लोग आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए सरसों का तेल आंखों में डालते हैं। इससे आंखों में धूल और मिट्टी चिपक जाती है। बाद में एलर्जी और खुजली शुरू हो जाती है। इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

डाॅ. ने बताया कि शिक्षक भी ध्यान रखें कि अगर स्कूल में बच्चा ब्लैक बोर्ड के पास बैठता है तो उस पर ध्यान दें कि कहीं उसे देखने में दिक्कत तो नहीं आ रही है। मोतियाबिंद का आॅपरेशन समय से कराने की सलाह भी दी। काला मोतियाबिंद को खतरनाक बताते हुए कहा कि इसे ग्लूकोमा भी कहते हैं। इससे कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। अंधेरे में लगर बिल्कुल नहीं दिखता और अधिक पानी पीने से सिरदर्द होने लगता है तो डाॅक्टर से सलाह जरूर लें। उन्होंने संस्थागत प्रसव पर जोर देते हुए कहा कि डिलीवरी के समय साफ कपड़े का इस्तेमाल किया जाए, जिससे इंफेक्शन न हो। कुपोषण और विकलांगता को दूर करने के लिए पर्याप्त डाइट लेने की सलाह भी दी।

उप मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. एके जाटव ने कहा कि हर माह के पहले और चौथे बुधवार को विकलांग प्रमाण पत्र बनते हैं। इसके लिए सिर्फ आधार कार्ड की जरूरत होती है। जल्द ही जिले में आॅनलाइन विकलांग प्रमाण पत्र बनाने की जानकारी भी उन्होंने दी। गुरूवार को ब्लाॅक संसाधन केंद्र पर लक्ष्मी महिला शिक्षा एवं जनकल्याण समिति की ओर से आयोजित हुए विकलांगता निवारण, बचाव, उपचार, पुनर्वास योजनाएं तथा अधिनियम प्रावधानों का प्रचार-प्रसार करने की गोष्ठी में कई अफसर और डाॅक्टर पहुंचे।

अफसरों ने भी रखी बात

सीडीओ उदयराज यादव ने कहा कि कभी-कभी विकास कार्यों को आधार बनाकर लोग अपने बच्चों को पल्स पोलियो की खुराक पिलाने से मना कर देते हैं। ऐसा वह जागरूकता न होने की वजह से करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते खुराक मिल जाए तो पोलियो की बीमारी नहीं पनपती है। उन्होंने पेंशन और दिव्यांगों की सर्जरी के बारे में भी बताया।

जिला विकलांग विकास अधिकारी/डीबीडब्ल्यूओ राजेश बघेल ने कहा कि 300 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से तिमाही पेंशन दिव्यांगों को दी जा रही है। आवेदन आॅनलाइन होते हैं। कार्यक्रम में पूर्व प्रधानाचार्य एनसी टंडन, डीएसडब्ल्यूओ संतोश पाठक और समिति की प्रबंधक रमन कटियार ने भी बात रखी।

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