गर्मियों में केले की खेती में करें उचित सिंचाई प्रबंधन 

Divendra SinghDivendra Singh   15 March 2018 1:18 PM GMT

गर्मियों में केले की खेती में करें उचित सिंचाई प्रबंधन केले में रखें नमी बरकरार।

मार्च-अप्रैल के महीने में जब तापमान बढ़ने से कई फसलों में नमी की कमी हो जाती है, केले की फसल में अच्छी गुणवत्ता के केले की पैदावार लेने के लिए, इस समय खेत में सही सिंचाई प्रबंधन करना चाहिए।

लखनऊ के जिला उद्यान अधिकारी डॉ. डीके वर्मा केला की खेती में सिंचाई प्रबंधन के बारे में बताते हैं, "अगले दो महीने में तापमान बढ़ जाता है, ऐसे में किसानों सिंचाई प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए, आजकल किसान सिंचाई के लिए ड्रिप विधि का प्रयोग करते हैं, लेकिन गर्मियों में ड्रिप काम नहीं करता है।"

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केला गर्म मौसम में होने वाली फसल है, इस की खेती के लिए 30-40 डिग्री वाले क्षेत्र ज्यादा सही माना जाता है। लेकिन गर्मी के मौसम यानी मई-जून के महीनों में तेज गरम हवा से पौधों को बचाने के लिए सही इंतजाम रखना जरूरी होता है। तेज गर्म हवा केले के लिए बहुत ही नुकसानदायक होती है।

अपने क्षेत्र की आबोहवा और खेत की उपजाऊ ताकत के आधार पर उम्दा किस्म के केले की बुवाई करनी चाहिए। टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे की फसल तकरीबन एक साल में तैयार हो जाती है।

समय-समय पर हटाए खरपतवार

डॉ. डीके वर्मा आगे बताते हैं, "इस समय गर्मियों में खेत में इतनी सिंचाई करनी चाहिए, जिससे खेत में नमी बनी रहे। खेत की पानी को सोखने की क्षमता भी ज्यादा होनी चाहिए, जिस से बारिश का पानी ज्यादा समय तक खेत में खड़ा न रह सके।"

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घार में केला तैयार होने में तकरीबन 100-140 दिन का समय लगता है, टिश्यू कल्चर से तैयार पौधों में 8-9 महीने बाद फूल आना शुरू होता है और तकरीबन एक साल यानी 12 महीने में फसल तैयार हो जाती है। इसलिए समय को बचाने के लिए और जल्दी आमदनी लेने के लिए टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे को ही लगाना चाहिए।

खड़ी फसल में जैसे ही कोई बीमारी वाला पौधा दिखाई दे, तो फौरन उसे उखाड़ कर जला दें और फसल पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के मुताबिक फौरन कारगर बीमारीनाशक दवा का छिड़काव करें।

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केला ज्यादा पानी की मांग करने वाली फसल है, पानी की बचत और कम पानी में ज्यादा रकबे की सिंचाई करने के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम को अपनाएं और फसल पर मल्चिंग का इस्तेमाल कर पानी को धूप और हवा द्वारा उड़ने से बचाएं।

करें निराई।

केले की फसल को ज्यादा खाद की जरूरत होती है, इसलिए खाद की खुराक मिट्टी की जांच के बाद ही तय करें। अक्टूबर के महीने में पौधे के चारों तरफ गन्ने की सूखी पत्तियां या पुआल वगैरह की 10-15 सेंटीमीटर परत बिछा दें। पौधों पर फूल यानी फल लगना शुरू हो जाए, तो पौधों को गिरने से बचाने के लिए उन्हें सहारा देने की जरूरत होती है।

सहारा देने के लिए बांस के डंडों से सहारा देना चाहिए। घार में लग रहे केले की लंबाई और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नर फूल काटना जरूरी होता है। जून महीने में लगाए गए केले के पौधों में अगले साल मई महीने में फूल निकलना शुरू होता है। पौधे पर फूल दिखाई देने के 30 दिन बाद पूरी घार पर केले बनने लगते हैं।

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