सिर्फ प्रधानों के घर तक सीमित प्रत्याशियों का प्रचार 

सिर्फ प्रधानों के घर तक सीमित प्रत्याशियों का प्रचार विधानसभा चुनाव में सभी प्रधानों की मदद से प्रत्याशी अपना प्रचार-प्रसार जोरों से कर रहे हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। “वोट मांगने लोग उन्हीं के घर जाते हैं जो लोग पैसे से मजबूत होते हैं। हम गरीबों के घर कोई नहीं आता है और न कोई सुनता है।” ये बताती हैं इमलीवती (60 वर्ष)।

विधानसभा चुनाव में सभी प्रधानों की मदद से प्रत्याशी अपना प्रचार-प्रसार जोरों से कर रहे हैं पर वोट मांगने के लिए प्रधानों के अलावा प्रत्याशी किसी गरीब के घर नहीं जा रहे हैं। लखनऊ जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर सरोजनी ब्लॉक के रामचौरा गाँव में रहने वाली इमलीवती बताती हैं, “मेरे सामने कई चुनाव बीत गए। पर अभी तक सड़क और नाली वैसी के वैसी पड़ी हुई है। जो हम गरीबों की सबसे बड़ी परेशानी है।” यह स्थिति रामचौरा गाँव की ही नहीं बल्कि हर गाँव की है। मुन्नी देवी बताती हैं, “गाँव में अभी तक चार नेता आ चुके हैं। लेकिन सब प्रधानों के दरवाजे तक आकर वहीं से लौट जाते हैं।”

बख्शी का तालाब भगौतीपुर के ग्राम प्रधान माता प्रसाद बताते हैं, “जो नेता काम करेगा तभी वोट पाएगा। हम लोग वोटरों से उनके पंसद के प्रत्याशियों को वोट दिलाने पर जोर दे रहे हैं। नेता गाँव के प्रधानों के साथ घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं।”

सोनवा के ग्राम प्रधान चुन्नी दीक्षित बताते हैं, “हम सब लोगों को वोट देने के लिए बोल रहे हैं। वैसे किसी पार्टी के पक्ष में नहीं हूं। जो अच्छा काम करेगा उसे वोट देंगे। सभी पार्टी के लोग गाँव में आकर वोट मांग रहे हैं। हम अपने वोटरों से उनको मिलवा देते हैं।”

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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