पशुधन व्यवसाय केंद्र से पशुपालकों को मिल रहा पशुओं का सही दाम

दिति बाजपेईदिति बाजपेई   12 Feb 2017 10:56 AM GMT

पशुधन व्यवसाय केंद्र से पशुपालकों को मिल रहा पशुओं का सही दाम‘पशुधन व्यवसाय सहायता केंद्र’ से बकरियों के पशु आहार बनाने, पशु खरीदने उन्हें बेचने, टीकाकरण, बैंक लोन लेने जैसे कई सुविधाएं दी जा रही हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। कई बार बकरी पालक किसान बकरी पालन तो करना चाहते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में बकरी पालन नहीं कर पाते हैं। एक संस्था प्रदेश के पांच जिलों में बकरी पालन की जानकारी देकर उन्हें बेहतर रोजगार दे रही है।

लखनऊ जिला मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर रसूलपुर सादात के निवासी यूसूफ खां बताते हैं, “पहले हम बिना वजन के ही बकरे को कम दाम में बेच देते थे, लेकिन इस केंद्र में हमें बताया कि बकरे के वजन के हिसाब से ही बकरे का मूल्य तय करें। अब हम बकरे का वजन करा कर ही उसे अच्छे दामों में बेचते हैं। इस केंद्र के खुलने से हमको बहुत लाभ हो रहा है।”

गैर सरकारी संस्था द गोट ट्रस्ट द्वारा पांच जिलों (लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, इलाहाबाद, प्रतापगढ़) में पशुधन व्यवसाय केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों में बकरियों के पशु आहार बनाने, पशु खरीदने उन्हें बेचने, टीकाकरण तकनीकी तरह से पशुपालन करने, बैंक लोन लेने जैसे कई सुविधाएं दी जा रही हैं।

19वीं पशुगणना के अनुसार पूरे भारत में बकरियों की कुल संख्या 135.17 मिलियन है, उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या 42 लाख 42 हजार 904 है।

प्रदेश में जो भी पशुचिकित्सालय हैं, उनमें इलाज ही किया जाता है। पशुपालकों को संगठन और बाजार की जानकारी नहीं दी जाती है। इसलिए हमने इन केंद्रों को खोला है। यहां हम बकरे-बकरियों का इलाज तो करते ही हैं साथ ही उनको बेचने, खरीदने, प्रंबधन, लोन जैसी कई जानकरी दे रहे हैं। अभी तक 800 ऐसे किसान हैं जो केंद्र से तकनीकी ज्ञान लेकर खुद का व्यवसाय कर रहे हैं।
संजीव कुमार, प्रबंध निदेशक, गोट ट्रस्ट, (लखनऊ)

संजीव बताते हैं, “कई पशुपालक हैं जो पशुपालन तो कर रहे हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में वो उनसे उतना मुनाफा नहीं कमा पा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर कोई भी पशुपालक जब बकरी या मुर्गी का चूजा खरीदने जाता है तो उसको नहीं पाता है कि कौन सी प्रजाति के चूजे से क्या लाभ मिलेगा और अगर खरीद भी लिया तो खाने की मात्रा, टीकाकरण की ज्यादा जानकारी नहीं होती है।”

केंद्र से पशुपालकों को मिलती है ये सुविधाएं

  • उत्तम गुणवत्ता के पशुआहार, बत्तख और मुर्गी के चूजे, चारा बीज।
  • पशुओं के फार्म का डिजाइन, व्यवसाय योजना निर्माण कम खर्च में उत्तम आवास सहायता और मार्गदर्शन।
  • पशुओं के क्रय-विक्रय की सुविधा देना।
  • पशुपालकों को वीडियो, फोटो, लेक्स द्वारा उपयोगी जानकारी देना।
  • बैंक और अन्य वित्तीय संस्था/कार्यक्रम, केंद्र और राज्य सरकार की पशुधन से स्वरोजगार योजना से जोड़ना।
  • व्यवसाय का लेखा-जोखा और लाभ-हानि रिकॉर्ड बनाने में मदद करना।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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