बिना रासायनिक दवाओं के आम के बाग का सपना सच, लखनऊ की मैंगो बेल्ट में जैविक बाग तैयार

बिना रासायनिक दवाओं के आम के बाग का सपना सच, लखनऊ की मैंगो बेल्ट में जैविक बाग तैयारलखनऊ की मैंगो बेल्ट के किसान ने तैयार की जैविक तरीकों से आम की बाग।

दीपांशू मिश्रा (स्वयं डेस्क)

माल (लखनऊ)। आम की खेती के लिए मशहूर लखनऊ के मलिहाबाद, माल जैसे क्षेत्र में जहां किसान ज्यादा उत्पादन के लिए खूब रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं वहीं एक ऐसे किसान भी हैं जिन्होंने अपनी आम की बाग पूरी तरह से जैविक यानि बिना रासायनों के इस्तेमाल के तैयार की है।

लखनऊ जिला मुख्यालय पश्चिम में लगभग 55 किलोमीटर दूर माल ब्लॉक के माल गाँव के रहने वाले अजय राज त्रिपाठी (50 वर्ष) के पास दस बीघा आम की बाग है। अजय भी दूसरे किसानों की तरह रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया करते थे, लेकिन एक बार उन्हें ऐसा झटका लगा कि उन्होंने तय कर लिया कि वे बाग में रासायनिक तत्वों का उपयोग पूरी तरह बंद कर देंगे।

बाग

अजय भी अपना आम बाहरी देशों में भेजा करते थे। वर्ष 2014 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) द्वारा भारतीय आमों की एक खेप रसायनिक तत्वों के अवशेष सीमा से अधिक पाएं जाने के चलते लौटा दी गई थी। इस लौटाई गई खेप में अजय के भी आम थे, जिसके बाद उनको भारी नुकसान झेलना पड़ा था। भारतीय आम कई देशों को निर्यात किया जाता है, इनमें से यूएई सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है।

हमारे भी फल उस समय वापस कर दिए गए थे, उसके बाद से हमने कीटनाशक का प्रयोग बिलकुल भी बन्द कर दिया और आज तक नहीं किया। गायों से मिलने वाले गोबर और गोमूत्र में नीम का तेल, धतूरा और मिर्च मिलाकर मैं जैविक खाद तैयार करने लगा और आम की बाग में यही प्रयोग करने लगा। मेरा उद्देश्य केवल आम कि खेती ही नहीं बल्कि ग्रामीणों को कीटनाशक के प्रयोग से रोकना भी है।
अजय राज त्रिपाठी, किसान

अजय आगे बताते हैं, जब आम की खेती जैविक तौर पर करने की अजय ने शुरुआत की तब उनके अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा था क्योंकि जैवकि खाद के लिए गोबर की व्यवस्था नहीं हो पाती थी। लेकिन जल्द ही जब अजय मिनी कामधेनु डेयरी योजना के तहत दुग्ध उत्पादन भी करने लगे तो इससे उत्पन्न होने वाले गोबर का फायदा अजय के बागों को मिला। एक व्यवसाय दूसरे व्यवसाय की कमी का पूरक बन गया।

अजय के आम के बागों में विभिन्न प्रजाति के आम लगे हैं, इनमें हुस्नआरा, अंम्बिका, टॉमी एंड किंग जैसी कई किस्मों के पेड़ शामिल हैं जो उन्होंने मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के अनुसंधान संस्थानों से इकट्ठा की हैं।

यही नहीं अजय हर वर्ष लगभग दो हजार पौधे लोगों को मुफ्त में देते हैं और लोगों को पेड़ लगाने को भी जागरूक कर रहे हैं। आम कि फसल के अलावा अजय कि बाग में आंवला, अमरुद, जामुन, अनार, लीची, कटहल, केला जैसी कई प्रकार की प्रजातियों के पेड़ लगे हैं।

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