मेरठ: दो दशक से बन रहा डिग्री कॉलेज अब भी अधूरा

मेरठ: दो दशक से बन रहा डिग्री कॉलेज अब भी अधूराकॉलेज के मैदान में कूड़ा डालते हैं स्थानीय लोग।

बसंत कुमार

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मेरठ। ''यह कॉलेज खुलेगा, इसकी तो अब उम्मीद भी नहीं बची है। जब से पैदा हुए तब से ही इसे ऐसे जर्जर स्थिति में देख रहे हैं। जहां बच्चे पढ़ने वाले थे, वहां अब आवारा जानवर नजर आते हैं। जिस मैदान में छात्रों को खेलना था, वहां कूड़ा भरा हुआ है और आवारा जानवर हैं। यह कहना है, नई बस्ती निवासी 22 वर्षीय संजीव का।

मेरठ शहर की नई बस्ती में 27 साल पहले जिस डिग्री कॉलेज का उद्घाटन हुआ, वो आज तक बनकर तैयार नहीं हुआ है। भारतीय बौद्ध सेवा संस्थान द्वारा 1990 में बनाना शुरू हुआ अम्बेडकर डिग्री कॉलेज में अब तक एक भी छात्र का नामांकन नहीं हो पाया। विवादों के चलते यह कॉलेज अब खंडहर का रूप ले चुका है। इसके मैदान में लोग कूड़ा फेंकते हैं।

भारतीय बौद्ध सेवा संस्थान से जुड़े और भारतीय मूल निवासी संगठन के अध्यक्ष धर्मेन्द्र प्रधान बताते हैं, ''1990 के आसपास नगर निगम ने सात बीघा ज़मीन भारतीय बौद्ध संस्थान को दे दिया था। दरअसल यह कॉलेज ना बने, इसके लिए शुरू से ही कुछ लोग अड़चन पैदा करते रहे हैं। पास में ही स्थित मलयाना गाँव के लोगों ने विवाद पैदा करके इसके निर्माण कार्य को रुकवाए रखा क्योंकि कॉलेज के पीछे मलयाना गाँव का श्मशान घाट है।

कॉलेज जब बनने लगा तो उन्होंने विवाद खड़ा कर दिया, जिसके बाद मुकदमा दर्ज हुआ और आज भी मुकदमा चल रहा है। वहीं, धर्मेन्द्र प्रधान बताते हैं कि ''यहाँ सफाईकर्मी केवल साल में एक ही दिन आते हैं। इसके लिए हम हर बार नगर निगम को लिखते रहे, डीएम को भी लिखा था, उन्होंने यहां का दौरा भी किया, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। कूड़ा घर जैसी स्थिति होती जा रही है।”

धर्मेन्द्र प्रधान कहते हैं, ''हम लगातार कॉलेज बनाने, साफ़ सफाई रखने की मांग करते हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। इसके पीछे मुख्य कारण इस संस्थान का दलित बस्ती में होना है।'' 1990 से अब तक मायावती चार बार मुख्यमंत्री रहीं, लेकिन उन्होंने भी निर्माण क्यों नहीं करवाया, सवाल के जवाब में धर्मेन्द्र कहते हैं कि मायावती ने भी इस संस्थान को शुरू करवाने में कोई मदद नहीं की, जबकि इसी पार्क में स्थानीय लोगों ने मायावती को सोने की मुकुट और कार गिफ्ट दिया था।

यह कॉलेज बन गया होता तो इससे हम लड़कियों को सबसे ज्यादा फायदा होता। आज हमें पढ़ने के लिए दूर जाना पड़ता है। अगर घर के पास कॉलेज होता तो हमें काफी सुविधा होती। मैं चाहती हूं कि भारतीय बौद्ध सेवा संस्थान के लोग अगर नहीं बनवा पा रहे हैं तो सरकार इसे अपने पास लेकर बनवा दे।
रंजू, नई बस्ती

इसके अलावा स्थानीय निवासी सुखवीर सिंह बताते हैं कि जब इसकी नींव रखी जा रही थी तो हमें बेहद ख़ुशी हुई थी कि हम तो नहीं पढ़ सके, लेकिन हमारे बच्चों को घर के बगल में ही कॉलेज होने से शिक्षा मिलेगी। खासकर लड़कियों को फायदा होगा, लेकिन हम लोगों का सपना सपना ही रह गया। जब से इस कॉलेज की नींव रखी गयी, तब से ही यह बंद है। बस्ती के लड़के तो बाहर पढ़ने चले जाते हैं, लेकिन लड़कियों को कई लोग बाहर पढ़ने के लिए नहीं भेजते हैं।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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