चुनाव बाद साढ़े चार लाख मजदूरों पर गिरेगी गाज, नहीं मिलेगा कई योजनाओं का लाभ 

चुनाव बाद साढ़े चार लाख मजदूरों पर गिरेगी गाज, नहीं मिलेगा कई योजनाओं का लाभ श्रम विभाग से मनरेगा मजदूरों का पंजीकरण होगा वापस।

लखनऊ। चुनाव के बाद प्रदेश के करीब साढ़े चार लाख मजदूरों को श्रम विभाग से मिलने वाली योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा। इस आशय का आदेश केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को भेज दिया है। निर्देश दिए गए हैं कि श्रम विभाग से मनरेगा मजदूरों का पंजीकरण वापस लिया जाएगा।

जुलाई 2013 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने उप्र भवन एवं अन्य सन्निर्माण कल्याण बोर्ड के तहत मनरेगा मजदूरों को पंजीकृत करने का आदेश दिया था। 50 दिन या उससे अधिक दिन काम का निर्धारण पात्रता रखी गई थी। मनरेगा के वेबसाइट के अनुसार 447338 मजदूर ऐसे हैं जिन्होंने कम से कम 50 दिन की मनरेगा मजदूरी की है।

जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर अरंभा गांव के मनरेगा मजदूर श्यामू कुमार (42 वर्ष) और उनकी पत्नी राजेश कुमारी वर्ष बताती है, “श्रम विभाग में कार्ड बनवाया था। वहां से मेरी बेटी की शादी करने के लिए 2000 रुपये मिले थे। इस बार हम लोगों ने ज्यादा काम नहीं किया है। सरकार जो हमें योजनाओं का लाभ दे रही है उससे हमें बहुत मदद मिल जाती है। अगर उन्हें भी हमसे छीन लेगी तो हम गरीबों की रोटी कैसे चलेगी। अभी हमें इस बात की कोई भी जानकारी नहीं है।”

भारत सरकार का शासनादेश आया है तो उसे मना नहीं कर सकते है क्योंकि बहुत से ऐसे मनरेगा मजदूर हैं जिनके लिए योजना एक वरदान की तरह है। चुनाव के बाद भारत सरकार से हम अपनी बात कहेंगे।
एसकेएस चन्दौल संयुक्त आयुक्त मनरेगा, उप्र

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार के सचिव एके सिंह ने दस फरवरी 2017 को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि 12 फरवरी 2013 में मनरेगा में 50 या उससे अधिक दिन काम करने वाले मजदूरों को भवन एवं सन्निर्माण कर्मकारों को श्रम विभाग की पंजीयन सूची से तत्काल वापस लिया जाए। अभी तक इस सूची में शामिल मजदूरों को 15 तरह की योजनाओं का लाभ मिलता था। एके सिंह बताते है, “प्रदेश में बहुत से ऐसे मनरेगा मजदूर जिन्होंने 50 दिन के लिए पंजीकरण करवाया था। एक्ट के अनुसार 90 दिन का काम करने का प्रावधान है, जबकि पंजीकरण 50 दिन के लिए हुआ है इसलिए मनरेगा मजदूरों को पंजीकरण की सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।”

बाराबंकी जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर हरक ब्लाक के मनरेगा मजदूर संदीप कुमार रावत (40 वर्ष) बताते हैं, “बाराबंकी में पहले फल का ठेला लगाता था। ज्यादा मुनाफा नहीं होता था। उसके बाद मनरेगा मजदूर के तहत मेरा पंजीकरण हो गया और मैं मनरेगा के तहत काम करने लगा। मेरी पत्नी अब फल का ठेला लगाती है, सरकार ने एक साइकिल दी है।

संयुक्त आयुक्त मनरेगा, उप्र एसकेएस चन्दौल ने बताया, “भारत सरकार का शासनादेश आया है तो उसे मना नहीं कर सकते है क्योंकि बहुत से ऐसे मनरेगा मजदूर हैं जिनके लिए योजना एक वरदान की तरह है। चुनाव के बाद भारत सरकार से हम अपनी बात कहेंगे।” उत्तर प्रदेश भवन निर्माण एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सचिव बीजे सिंह बताते हैं, “एक्ट के अनुसार मनरेगा मजदूरों को 90 दिन काम करना है लेकिन यह 50 दिन कार्य कर रहे हैं इसलिए इनके पंजीकरण वापस लिए जा रहे हैं। भारत सरकार द्वारा यह निर्देश जारी किए हैं इसलिए हम कुछ नहीं कर सकते है।”

इन योजनाओं का मिल रहा है लाभ

भारत सरकार ने मनरेगा भारत सरकार ने अचानक मनरेगा श्रमिकों के लिए यह फैसला लिया है, जो बहुत से मनरेगा मजदूरों की जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर देगा। श्रम विभाग के द्वारा इन्हें लगभग 15 योजनाओं शिशु हितलाभ योजना, बालिका मदद योजना, साइकिल सहायता योजना, पेंशन योजना, सौर ऊर्जा सहायता योजना, अंत्येष्टि सहायता योजना, कौशल विकास तकनीकी, दुर्घटना सहायता योजना, पुत्री विवाह, अनुदान योजना आदि का लाभ मिल रहा था।

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