लाखों आवेदन अटके, कैसे मिले गरीबों को अनाज

लाखों आवेदन अटके, कैसे मिले गरीबों को अनाजपात्र गृहस्थी योजना का हाल, कार्ड बनने के बाद भी नहीं मिला राशन

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। गरीब ग्रामीणों के लिए केंद्र सरकार ने छह मार्च 2016 को पात्र गृहस्थी योजना की शुरुआत की थी। इस योजना में गरीब ग्रामीणों को प्रति यूनिट 10 किलो गेहूं और 25 किलो चावल देने की योजना थी।

इसी प्रकार पात्र गृहस्थियों को प्रति सदस्य तीन किलो 500 ग्राम गेहूं व एक किलो 500 ग्राम चावल देने की योजना थी। गेहूं दो रुपए प्रति किलो की दर से और चावल तीन रुपए प्रति किलो की दर से वितरित किया जा रहा है, मगर प्रधान, कोटेदार और खण्ड विकास अधिकारी की हीलाहवाली के चलते पात्र लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि इस योजना के अन्तर्गत लाखों आवेदन हो रहे हैं।

गृहस्थी पात्र जितने भी लोग हैं, उन्हें अनाज समय पर मिल रहा है। प्रधान और कोटेदार की कमी हो तभी समस्या होती है। कमियों को दूर करने का पूरा प्रयास किया जाएगा। आवेदनों की संख्या बहुत है, चुनाव के बाद ही कुछ काम हो सकेगा। चुनाव के बाद कार्ड धारकों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
संतोष विक्रम शाही, जिलापूर्ति अधिकारी, लखनऊ

योजना के अर्न्तगत ग्रामीणों को 80 प्रतिशत और शहर में 20 प्रतिशत सस्ते दामों पर अनाज दिया जाना था, लेकिन गाँवों में स्थिति कुछ और है। सोनवा ग्राम पंचायत योगेन्द्र दीक्षित के प्रधान बताते हैं, “योजना के तहत जो सरकार ने वादा किया था, उसे अभी तक पूरा नहीं किया है। सरकार ने कहा था कि इस योजना के तहत 80 प्रतिशत ग्रामीणों को अनाज मिलना है, जिसमें अब तक 40 प्रतिशत ग्रामीणों को अनाज मिला है।

अनाज के लिए लोगों की मांग ज्यादा है, लेकिन जिनके कार्ड नहीं बने। अनाज लिस्ट के आधार पर आता है। कभी-कभी अनाज को लेकर समस्या होती है। प्रधान ग्रामीणों की लिस्ट लगातार बना रहे हैं। आवेदन बड़ी संख्या में हो रहे हैं। लेकिन राशन लिस्ट में नाम नहीं बढ़ रहे हैं।
सरोज सिंह, कोटेदार, करुवा ग्राम पंचायत, बाराबंकी

योजना के लिए ग्रामीणों ने आवेदन बड़े स्तर पर किया है, लेकिन कार्ड नहीं बन रहे हैं। इस बात को लेकरकई बार हम बड़े स्तर पर धरना प्रदर्शन भी करचुके हैं। हमारे यहां लगभग 500 लोगों को सस्ते अनाज की जरूरत है, लेकिन 265 लोगों को अनाज मिल रहा है।”

सिर्फ यही ही नहीं, भगौतीपुर गाँव के प्रधान गाया प्रसाद मौर्या बताते हैं, “हमारे गाँव में बहुत से लोगों के कार्ड नहीं बने हैं। 400 आदमी के कार्ड बनवाये गए हैं, जिसमें से केवल 241 कार्ड धारक को अनाज मिल रहा है। बहुत से पात्र लोग छुटे हुए हैं। आधे से ज्यादा जरूरतमंदों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लाखों की संख्या में आवेदन लम्बित हैं।

वहीं, बख्शी का तालाब ब्लॅाक के खण्ड विकास अधिकारी सूर्यमणि वर्मा बताते हैं, “हमारे पास 30 से 40 हजार आवेदन हो चुके हैं, लेकिन राशन इतने लोगों को नहीं मिल रहा है। आवेदन करवाना हमारा काम है। राशन की जिम्मेदारी हमारी नहीं। ग्राम पंचायत भगौतीपुर के कोटेदार हसंराज सिंह बताते हैं, “हमारे यहां पर जितने कार्डधारक हैं, उन सभी को राशन मिलता है। हमारे पास लिस्ट जो बनी है, उसी के आधार पर राशन देते हैं। कभी-कभी राशन कम ज्यादा हुआ करता है। कभी चावल ज्यादा मिलता है तो कभी गेहूं ज्यादा मिलता है।”

उत्तर प्रदेश में 2.99 करोड़ कार्ड धारक

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) की पात्रता सूची के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 2.99 करोड़ गृहस्थी पात्र कार्ड धारक हैं, जिसमें से 13.34 करोड़ लाभार्थी हैं। लखनऊ जिले में छह लाख परिवार को आनाज मिल रहा है। वहीं 40 लाख अंत्योदय कार्ड धारक हैं, जिसमें से 1.63 करोड़ लाभार्थी को लाभ मिल रहा है। गाँवों में लाभार्थी की संख्या बहुत है, लेकिन बहुत से ग्रामीणों को अनाज नहीं मिल पा रहा है। लगातार प्रधान शिकायत कर रहे हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।

तहसील दिवस में भी की शिकायत

जिला मुख्यालय से 36 किलोमीटर दूर अकड़रिया गाँव की रहने वाली निर्मला देवी (55 वर्ष) भी राशन न मिलने से परेशान हैं। निर्मला देवी बताती हैं, “हमारे पास राशन कार्ड है, जिसमें दो रुपए किलो अनाज मिलता है। पहले समय पर अनाज मिला लेकिन अब चार माह से कोई अनाज नहीं मिला है। कई बार तहसील दिवस में शिकायत की पर कोई सुनवाई नहीं है। ऐसे में हमारी कोई सुनवाई भी नहीं होती है। इसलिए हम लोगों सस्ता राशन लेने के लिए कहां जाएं।”

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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