माडल तालाब बना खनन का जरिया 

माडल तालाब बना खनन का जरिया न्यायालय के आदेश को ताख पर रखकर बेख़ौफ़ अंदाज में पूरा दिन खनन होता रहा।

नवीन दिवेदी, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

उन्नाव। प्रदेश में नयी सरकार गठित होने के बाद सूबे के मुख्यमंत्री कानून व्यवस्था पटरी पर लाने के लिए भले ही एक्शन में दिख रहे हो परंतु सरकार के इन दिशा निर्देशों का असर बीघापुर तहसील प्रशासन पर पड़ता नही दिख रहा।

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तहसील प्रशासन के जिम्मेदारों के लापरवाह रवैये व खाऊ—कमाऊ नीति के चलते लम्बे अर्से से बेपटरी चल रही कानून व्यवस्था में फिलहाल खास सुधार होता नहीं दिख रहा। तहसील क्षेत्र में नियम कानून का मखौल उड़ाने वालों के हौसले बुलंद हैं। कुछ एेसा ही नजारा रविवार को क्षेत्र के कुंदनपुर गांव में देखने को मिला। यहां पेयजल संरक्षण के उपक्रम में लाखों रुपये की लागत से निर्मित हुआ माडल तालाब मिट्टी खनन का जरिया बन गया है। रविवार को यहां न्यायालय के आदेश को ताख पर रखकर बेख़ौफ़ अंदाज में पूरा दिन खनन होता रहा।

वहीं इस जरा सी बात पर खाकी का रौब दिखाने वाली स्थानीय पुलिस सहित तहसील प्रशासन द्वारा जानकारी के बावजूद खनन पर अंकुश लगाने की कवायद नहीं की गई।2009-10 में कुंदनपुर गांव के मुहाने पर बना माडल तालाब ग्राम पंचायत द्वारा ध्यान न दिये जाने से बदहाली के करीब पहुंच चुका है। रही सही कसर खनन माफियाआें ने पूरी करने का निश्चय सा कर लिया है।खनन माफिया तालाब की बाउंड्रीवाल की मिट्टी का खनन कर धीरे धीरे पुन: उसे समतल करने की फिराक में दिख रहे हैं। वहीं प्रशासन व ग्राम प्रधान के मूक समर्थन से किए जा रहे इस दुस्साहसिक कार्य से ग्रामवासियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

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