एनडीआरएफ ने स्थानीय निवासियों को दिया बाढ़ से बचाव का प्रशिक्षण

एनडीआरएफ ने स्थानीय निवासियों को दिया बाढ़ से बचाव का प्रशिक्षणजिला आपदा नियंत्रण केंद्र, बहराइच।

रोहित श्रीवास्तव, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

बहराइच यह जिला प्रदेश के तराई जिलों में शुमार है। अक्सर मानसून के आने पर बाढ़ जैसी आपदा जनजीवन अस्त-व्यस्त कर देती है। चूंकि प्रदेश में मानसून ने दस्तक दे दी है और बाढ़ की भयावह स्थिति से कई बार रूबरू हो चुका यह जिला अबकी पहले से ही सचेत नजर आ रहा है। एनडीआरएफ ने लोगों को बाढ़ से बचाव के तरीके सिखाए।

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बतातें चले कि जिले में चार ब्लॉक बाढ़ के प्रभाव में आते हैं, जिसमें बाढ़ अपनी भयावह स्थिति से विनाशलीला विगत कुछ वर्षों में दिखा चुका है। सरकार बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए कितना तैयार है यह जानने के लिए गाँव कनेक्शन की टीम आपदा केन्द्र बहराइच पहुंची। वहां मौजूद ईआरसी राजेश श्रीवास्तव ने बताया, ‘‘इस बार बाढ़ आने से पूर्व ही सरकारी कर्मचारी पूरी तरह तैयार हैं।” उन्होंने बताया कि बाढ़ में प्रमुख चार तहसीलें प्रभाव में रहती हैं, जिसमें सबसे पहली तहसील जिस पर बाढ़ का प्रभाव सबसे अधिक व सबसे पहले पड़ता है वह महसी तहसील है, जहां सरयू नदी ने पिछले वर्ष क्षति पहुंचाई थी।

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इस सन्दर्भ में उन्होंने बताया, “एनडीआरएफ (नेशनल डिजास्टर रिस्पान्स फोर्स) ने बाढ़ पीड़ित तहसीलों में जाकर लोगों को बचाव के तरीके सिखाए हैं।” उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ एक प्रशिक्षण प्राप्त कम्पनी है, जिसका कार्य बाढ़ आपदा के समय लोगों की मदद करना है। उन्होंने बताया कि हमने चारों तहसीलों में जैसे नानपारा, मीहिंपुरवा, महसी, कैसरगंज इन सभी तहसीलों में बाढ़ में बचाव राहत कैम्प की चैकियां बना कर रखी हैं, जिसमें नानपारा में सात चौकियां, मिहीपुरवा में 19 चौकियां, महसी में 15 चौकियां व कैसरगंज में सात चौकियां बनाई हैं। कुल मिलाकर बाढ़ प्रभावित तहसीलों में कुल 48 चौकियां तैयार की गईं हैं। वहीं नाव व मोटर बोट्स के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि वैसे सरकारी 52 नाव हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर 483 प्राइवेट नाव मौजूद हैं। उन्होंने आगे बताया कि 12 मोटराइज्ड बोट्स साथ ही सात मोटर बोट्स भी उपलब्ध हैं।

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