लोकल मंडी नहीं, कम दामों में बिक रही दलहनी फसलें 

Devanshu Mani TiwariDevanshu Mani Tiwari   22 Feb 2017 10:36 AM GMT

लोकल मंडी नहीं, कम दामों में बिक रही दलहनी फसलें स्थानीय मंडी न होने के कारण वो अपनी फसल दाल व्यापारियों को कम दामों पर बेचने को मजबूर हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

सुल्तानपुर। जिले में राजापुर गाँव के अजय कुमार सिंह (50 वर्ष) ने पांच बीघे खेत में अरहर की खेती की। इस वर्ष अरहर की पैदावार से वो बहुत खुश हैं, लेकिन अच्छी फसल होने के बाद भी दालों की बिक्री के लिए स्थानीय मंडी न होने के कारण वो अपनी फसल दाल व्यापारियों को कम दामों पर बेचने को मजबूर हैं।

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सुल्तानपुर जिले के लंभुआ ब्लॉक में राजापुर गाँव के किसान अजय बताते हैं, “हम हर साल अरहर बोते हैं और बेचते हैं। इस बार फसल अच्छी हुई है, इसलिए जो दाल पिछले वर्ष 4,000 रुपए कुंतल बिकी थी, वो इस साल 4,500 से 4,700 तक बिक जाएगी।” (सरकार ने इस वर्ष अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,050 रुपए प्रति कुंतल रखा है।)

अजय की तरह ही देश में हज़ारों की संख्या में दलहनी फसलों के किसान मंडियों व खुले बाजार मंचों की कमी के कारण सरकार द्वारा निर्धारित किये गए फसलों के मूल्य से कम राशि में अपनी फसल को छोटे व्यापारियों व आढ़तियों को काम दामों में बेच देते हैं।

कृषि मंत्रालय भारत सरकार के मुताबिक मौजूदा समय में भारत में कुल 971 सरकारी खरीद केंद्र हैं। इनमें से 514 खरीद केंद्रों पर अरहर की खरीद, 269 केंद्रों पर मूंग व 188 केंद्रों पर उर्द दाल की खरीद की जाती है। सुल्तानपुर जिले में हनुमानगंज क्षेत्र में बड़े स्तर पर दालों के बीजों की बिक्री कर रहें कृषि बीज विक्रेता सुभाष चंद्र उपाध्याय बताते हैं,” पूरे सुल्तानपुर जिले में अरहर, उरद, मसूर की खेती की जाती है पर जिले में दाल की खरीद के लिए कोई भी सरकारी व्यवस्था नहीं बनाई जा सकी है।” वो आगे बताते हैं कि जिले में एफसीआई के केंद्र ज़रूर हैं, पर वहां पर दूसरे जिलों से स्टॉक आता है। दाल बेचने में स्थानीय किसानों को इन केंद्रों से कोई लाभ नहीं मिल पाता है

हिचकिचा रहे किसान

देश में 20 लाख टन के दलहनी बफर स्टॉक को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), लघु कृषक कृषि प्यापार संघ (एसएफएसी) और राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) जैसे सरकारी संस्थाओं को ज़िम्मेदारी दी है। इन संस्थाओं को देश की कुल 10 लाख टन दाल घरेलू दाल खरीदने का लक्ष्य दिया गया है। लेकिन मौजूदा समय में दालों को मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम पर लिए जाने से किसान दाल बेचने में हिचकिचा रहे हैं। इससे देश के दलहनी बफर स्टॉक को पूरा करने समय लग रहा है।

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