अब बरसात नहीं है, फिर भी पुल पर रहता है ढाई से तीन फिट पानी

अब बरसात नहीं है, फिर भी पुल पर रहता है ढाई से तीन फिट पानीपुल पर ढाई से तीन फीट पानी है, राहगीरो को आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अरविन्द्र सिंह परमार, स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

महरौनी। बरसात में आएदिन पानी की बाढ़ आती रहती है, उस समय बाढ़ जैसे हालातों में जनमानस को परेशान होना आम बात है। अब बरसात का मौसम नही है, बरसात के बाद छह महीने हो चुके है, गर्मी आने वाली है इसके बाद भी ललितपुर जनपद से 47 किमी पूर्व उत्तर दिशा महरौनी से बानपुर मार्ग के मध्य मे जांमनी नदी के पुतली घाट पर बने पुल पर ढाई से तीन फीट पानी बना रहता, जिससे राहगीरो को हमेशा पुल पार करना किसी चुनौती से कम नही है।

बरसात में यह मार्ग चार महीने को बंद हो जाता है, 30 से 40 किमी का चक्कर काटना आम बात हो जाती है, बरसात तो चली गयी लेकिन पुल का पानी कम नही हुआ, अभी ढाई से तीन फीट पानी पुल पर है, आने जाने मे काफी परेशानी का सामना करना पडता है,राहगीरो को पुल पर गिरना आम बात है।
सुनील पचभैया (28 वर्ष), बानपुर गाँव

छायन गाँव के जगजीवन (उम्र 26 वर्ष) अध्यापक बताते है कि" मुझे बानपुर पढाने के लिए रोज जाना पडता है, पुल पर पानी है। निकलने मै काफी परेशानी होती है, पुल पर राहगीर हमेशा गिरते रहते है! और राहगीरो का सामान भीग जाता है। क्षेत्र के लोगों ने कयी बार जिला प्रशासन को शिकायती की, ना तो पुल का पानी कम हुआ, ना ही शिकायत का हल! परेशानी एक सी बनी हुयी है।

पुल पर जल भराव की समस्या बताते हुए सुनवाहा ग्राम पंचायत के प्रधान छत्रपाल सिंह बताते है कि" पुतली घाट से कुछ दूरी पर हमारी पंचायत की ग्राम सभा वीर मौजे में जांमनी नदी पर चैक डैम बना है, जांमनी नदी मे जलभराव बना रहता है, इसी बजह पुल नीचा होने के कारण ढाई से तीन फिट पानी है। वो आगे बताते है कि आस पास के दो दर्जन से अधिक गाँवो के ग्रामीणों को सात किमी की बजह 30 से 40 किमी का चक्कर लगाकर महरौनी पहुंच पाते है।

ढ़गरया गाँव के भूपेन्द्र सिंह (36 वर्ष) बताते है कि "बरसात के पहले पुतली घाट से निकले थे, तब से आज तक उस रास्ते पर नही गये, जब कि दूसरे रास्ते से चक्कर काटकर महरौनी जाते है"

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