ऐप दूर करेगा युवाओं की भ्रांतियां, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने लांच किया मोबाइल ऐप 

Swati ShuklaSwati Shukla   24 Feb 2017 4:04 PM GMT

ऐप दूर करेगा युवाओं की भ्रांतियां, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने लांच किया मोबाइल ऐप किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के एक हिस्से के रूप में लड़कियों और लड़कों के लिए ‘साथिया’ रिसोर्स किट एवं ‘साथिया सलाह’ मोबाइल ऐप लांच किया है।

स्वयं डेस्क प्रोजेक्ट

लखनऊ। बढ़ती उम्र के साथ किशोर और किशोरियों में शरीर और मानसिक बदलाव होने पर बहुत सी भ्रतियां होती हैं। इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के एक हिस्से के रूप में किशोरवय के लड़कियों और लड़कों के लिए ‘साथिया’ रिसोर्स किट एवं ‘साथिया सलाह’ मोबाइल ऐप लांच किया है।

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इतना ही नहीं, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की ओर से मोबाइल ऐप और साथिया रिसोर्स किट के साथ-साथ एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। इस हेल्पलाइन नंबर पर युवाओं को विशेषज्ञों के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। वहीं, इस योजना में माता-पिता को भी जागरुक किया जाएगा, जिससे वे अपने बच्चों को पहले से ही शरीर में होने वाले परिवर्तन के बारे में बता सकते हैं। ऐसी पहल इसलिए भी की गई है क्योंकि आज भी गाँव में ऐसा होता है कि जब युवाओं में शारीरिक परिवर्तन होते हैं तो नीम-हकीम की दवाइयां लेते हैं।

वहीं, सही जानकारी के अभाव में लड़के और लड़कियां गलत कदम भी उठा लेते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। मगर इस हेल्पलाइन नंबर के जरिए किशोर-किशोरियों में होने वाला परिवर्तन के बारे में वह नि:संकोच बात कर सकते हैं। इतना ही नहीं, इसलिए हर तीसरे माह में गाँव-गाँव में किशोर-किशोरियों के साथ बैठक कर इन सारे विषयों जानकारियां दी जाएगी। युवाओं के लिए हेल्पलाइन नंबर 18002331250 जारी किया गया है, जिसमें वे जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

इस बारे में रिसोर्स किट एवं मोबाइल ऐप को लांच करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव सीके मिश्रा ने बताया कि हमारे देश में 2 करोड़ 53 लाख किशोरावस्था में कदम रख रहे लड़कियां एवं लड़के हैं, जिनकी संख्या विश्व में सबसे अधिक है। इस पहल से युवाओं को काफी लाभ मिलेगा, खासकर गाँव के किशोर और किशोरियों को। साथ ही विभाग गाँव-गाँव जाकर प्रशिक्षण देगा, जिससे गाँव के युवा भी इसका हिस्सा बनेंगे।

हमारे देश में 2 करोड़ 53 लाख किशोरावस्था में कदम रख रहे लड़कियां एवं लड़के हैं, जिनकी संख्या विश्व में सबसे अधिक है। इस पहल से युवाओं को काफी लाभ मिलेगा, खासकर गाँव के किशोर और किशोरियों को। साथ ही विभाग गाँव-गाँव जाकर प्रशिक्षण देगा, जिससे गाँव के युवा भी इसका हिस्सा बनेंगे।
सीके मिश्रा, सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण।

उन्होंने कहा कि हमारे देश के युवा महत्विपूर्ण हैं, जो भविष्य में देश की अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े लाभदायक हिस्सा बन जाएंगे इसलिए उनका स्वास्थ्य एवं तंदरुस्ती हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। आरकेएसके कार्यक्रम के जरिए किशोर वय के लड़कियों एवं लड़कों के लिए छह कार्यनीतिक प्राथमिकताओं- पोषाहार, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य (एसआरएच), गैर-संचारी बीमारियां (एनसीडी), मादक द्रव्यों का दुरुपयोग, जख्म एवं हिंसा (जेंडर आधारित हिंसा समेत) और मानसिक स्वास्थ्य की पहचान करता है।

इन विषयों पर मिलेगी जानकारी

पोषाहार, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य (एसआरएच), गैर-संचारी बीमारियां (एनसीडी), मादक द्रव्यों का दुरुपयोग, जख्म एवं हिंसा (जेंडर आधारित हिंसा समेत) और मानसिक स्वास्थ्य।

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