शैक्षिक सत्र के पहले दिन झाड़ू लगाते नज़र आए बच्चे

शैक्षिक सत्र के पहले दिन झाड़ू लगाते नज़र आए बच्चेशैक्षिक सत्र के पहले दिन बच्चों ने लगाई झाड़ू।

मीनल टिंगल, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। नए शैक्षिक सत्र के पहले दिन ज्यादातर स्कूलों में बच्चों की संख्या बेहद कम नजर आई। जिन स्कूलों में बच्चे पहुंचे भी तो वहां पढ़ाई की बजाय या तो झाड़ू लगाते नजर आए या फिर सोते दिखाई दिए।

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प्राथमिक विद्यालय पूरेगौरी, गोमतीनगर में शैक्षिक सत्र के पहले दिन बच्चे झाड़ू लगाते दिखे। जैसे ही बच्चों की नजर कैमरे पर पड़ी उन्होंने अपनी टीचर से इस बात का जिक्र किया। इसके बाद तुरंत ही स्कूल का मंजर बदला नजर आया। बच्चे की बजाय इस बार झाड़ू शिक्षिकाओं के हाथ में दिखी। शिक्षिकाओं का कहना था जब एसएसपी अपने कार्यालय में झाड़ू लगा सकती हैं तो हम लोग क्यों नहीं।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय काकोरी में बेहद कम बच्चे स्कूल में दिखे। स्कूल के प्रधानाचार्य शाहिद अली आब्दी कहते हैं, “बहुत प्रयास करते हैं कि स्कूल में बच्चे नये शैक्षिक सत्र में आएं और पढ़ाई करें लेकिन कम ही आते हैं। अभी गेहूं की कटाई शुरू होने वाली है फिर तो ज्यादातर बच्चे स्कूल नहीं आएंगे चाहे कितनी भी कोशिश की जाए। हम लोग अपना काम करने आते ही हैं और जो बच्चे आ रहें हैं, उनको पढ़ाना हमारी ड्यूटी है।”

प्राथमिक विद्यालय आमआसरे पुरवा, हुसड़िया में भी पढ़ाई के समय सफाई अभियान जारी दिखा। बच्चियों ने स्कूल में झाड़ू लगाकर स्कूल की गंदगी तो हटा दी लेकिन स्कूल के बाहर कूड़े का बड़ा ढेर लगा रहा। झाड़ू लगा रही बच्ची रेखा ने बताया, “पहली बार झाड़ू नहीं लगा रही, अक्सर ही लगाते हैं क्योंकि कोई सफाई वाला नहीं आता और स्कूल गंदा रहता है इसलिए हम लोग ही झाड़ू लगा लेते हैं। शिक्षिकाओं ने इस बारे में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।”

वहीं इस बारे में सहायक निदेशक, मण्डलीय महेन्द्र सिंह राणा ने कहा, “जिन स्कूलों में बच्चे नहीं पहुंच रहें हैं वहां बच्चों को लाने के प्रयास तेज किए जाएंगे। जहां बच्चों के झाड़ू लगाने की बात सामने आई है उन स्कूलों के जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगा जाएगा। बच्चों से स्कूल में झाड़ू लगवाना गलत है।” यह पूछने पर कि पहली अप्रैल को शैक्षिक सत्र शुरू करना क्या मात्र औपचारिकता है? इस पर उन्होंने कहा, “शासन द्वारा शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू करने की बात कही गई है, जिसका पालन किया जा रहा है। शैक्षिक सत्र चूंकि 12 महीने का ही होता है इसलिए इसको बढ़ाया नहीं जा सकता। मैं स्कूलों में औचक निरीक्षण करूंगा ताकि यह पुख्ता कर सकूं कि मात्र औपचारिकता न होकर बच्चों को सही तरह से पढ़ाया जाए।”

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