मंडियों में भंडारण सुविधा न होने से खराब हो रही प्याज

Devanshu Mani TiwariDevanshu Mani Tiwari   29 March 2017 7:19 PM GMT

मंडियों में भंडारण सुविधा न होने से खराब हो रही प्याजइस वर्ष के अंत तक महंगी हो सकती है प्याज।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। लखनऊ में सीतापुर रोड पर नवीन गल्ला मंडी में सब्जियों के बड़े व्यापारी राकेश गुप्ता (45 वर्ष) का तीन बोरी प्याज़ पिछले चार दिनों में खराब हो गयी। मंडी में लगातार घट रही प्याज की आवक से व्यापारी प्याज को स्टॉक कर रख रहे हैं, लेकिन गर्मी बढ़ने से प्याज खराब होने का खतरा भी बढ़ रहा है।

सब्जी व्यापारी राकेश गुप्ता ने बताया, ''पिछले 10 दिनों में मंडी में नासिक और हरियाणा से आने वाला प्याज कम हो गया है, इसलिए हम लोग प्याज स्टॉक कर रख रहे हैं। मंडी में प्याज स्टोर करने के लिए कोई भी सुविधा नहीं है, इसलिए गर्मी के मौसम में प्याज खराब हो रही है।''

प्रदेश की मंडियों में पिछले एक सप्ताह से प्याज की आवक लगातार घट रही है। उत्तर प्रदेश में प्याज मुख्य रूप से महाराष्ट्र और हरियाणा राज्यों से आता है, पर इन राज्यों में फसल आखिरी चरण में हैं, जिससे वहां की मंडियों में प्याज की लोकल आवक घटी है। इसका असर उत्तर प्रदेश की मंडियों में आने वाली प्याज की आवक पर पड़ रहा है। नतीजन सब्जी प्यापारी अपने माल को मंडी में ही स्टोर करके रख रहे हैं।

मंडियों में खराब हो रही प्याज की आवक को गंभीरता से लेने की बात कहते हुए कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार के सह निदेशक दिनेश चंद्र बताते हैं, ''प्रदेश की मंडी में प्याज अधिकतर दूसरे राज्यों से डिमांड और सप्लाई के आधार पर आता है, इसलिए प्रदेश में सरकार इन खाद्यों के लिए अलग से भंडारण प्यवस्था नहीं बनाती है। मंडियों में व्यापारी प्याज को किसी खुली हवादार जगह पर स्टोर करके रखें। प्याज को नमी से दूर रखें।''

कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के वर्ष 2016-17 के वार्षिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016-17 में देश में प्याज का उत्पादन 197 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष देश में 209 लाख टन प्याज का उत्पादन हुआ था। इसका असर भारत के प्याज के निर्यात पर भी पड़ा है। प्याज के घटे रक्बे और विदेशों में घट रही प्याज की मांग के कारण भारत में प्याज के निर्यात में 50 फीसदी गिरावट आई है। वर्ष 2016 में भारत 30,000 टन प्याज का निर्यात हुआ था।

इस वर्ष प्याज की मंहगाई बढ़ने का दावा करते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्री राकेश सिंह बताते हैं, ''महाराष्ट्र पूरे देश में प्याज की खेती का केंद्र है। इस वर्ष महाराष्ट्र के साथ-साथ पूरे देश में प्याज का रकबा घटा है। इसका मुख्य कारण है इस वर्ष बहुत सस्ते दाम पर प्याज का बिकना। इससे साल के अंत तक प्याज में जबरदस्त मंहगाई हो सकती है।

कृषि मंत्रालय भारत सरकार के वर्ष 2016-17 के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष देश में 12 लाख हेक्टेयर में प्याज की खेती हुई है, जबकि पिछले वर्ष देश में प्याज का रकबा 13.20 लाख हैक्टेयर था।

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