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खुले बाजार से होगा किसानों का भला

देवांशु मणि तिवारी, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। भारत में अनाज के व्यापार में सबसे बड़ी कमी देश की लंबी और असंगठित अनाज खरीद प्रणाली है। अनाज पैदा करने वाले किसानों को अपनी उपज खेत से व्यापारी तक पहुंचाने में काफी समय लग जाता है। इससे अनाज की खरीददारी की गति धीमी पड़ जाती है, जिसका असर अनाज भंडारण पर पड़ता है। ऐसे में जरूरत है एक ऐसे खुला बाजार की, जहां किसानों की उपज का उन्हें सही दाम मिले।

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रायबरेली के अलीपुर गाँव के किसान रामलखन वर्मा (51 वर्ष) हर वर्ष गाँव में ही गल्ला व्यापारियों को गेहूं बेचते हैं। गल्ला व्यापारी किसानों से आधे दाम पर गेहूं खरीदकर बाज़ार में अनाज बेचते हैं और पूरा अनाज बिक जाने पर किसानों को उनकी उपज का पूरा भुगतान करते हैं। रामलखन बताते हैं, ‘’पिछले वर्ष हमने 20 कुंतल गेहूं गाँव में ही व्यापारी को बेचा था, लेकिन अभी तक हमें गेहूं का पूरा पैसा नहीं मिला है।’’

अनाज बिक्री की कोई भी उचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें अपनी फसल व्यापारियों को औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती हैं। भारत में अनाज बिक्री के लिए गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में खुले बाज़ार मंच की व्यवस्था शुरू की गई है। इन चुनिंदा प्रदेशों के अलावा किसी भी प्रदेश में अनाज बिक्री के लिए अभी तक कोई भी खुला बाज़ार नहीं बनाया जा सका है।

सुल्तानपुर जिले में धनीछे गाँव के जय प्रकाश सिंह (49 वर्ष) पांच बीघे खेत में अरहर की खेती करते हैं। इस वर्ष अरहर की पैदावार से वो बहुत खुश हैं, लेकिन आसपास कोई भी अनाज की मंडी न होने के कारण वो अपनी फसल गल्ला व्यापारियों को फिर से कम दामों पर बेचना पड़ेगा।। जय प्रकाश बताते हैं, “हम हर साल अरहर बेचते हैं। इस बार फसल अच्छी हुई है।

व्यापारी अरहर 4,500 से 4,700 तक ले रहे हैं।” जबकि सरकार ने इस वर्ष अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,050 रुपए प्रति कुंतल रखा है। जयप्रकाश की तरह ही देश में लाखों की संख्या में अनाज उगाने वाले किसान मंडियों व खुले बाजार मंचों की कमी के कारण सरकार द्वारा निर्धारित किये गए फसलों के मूल्य से कम राशि में अपनी फसल को छोटे व्यापारियों व आढ़तियों को काम दामों में बेच देते हैं।

खुली बाजार व्यवस्था हो तो बने बात

देश में अनाज की बिक्री के लिए अच्छी ढांचाकृत सुविधा बनाए जाने की बात कहते हुए कृषि विपणन, मुख्यालय उत्तर प्रदेश के सह निदेशक ओमप्रकाश बताते हैं, ‘’भारत में अनाज खरीद के लिए विदेशों जैसी खुली बाज़ार व्यवस्था नहीं है।

यहां अनाज पैदा करने वाले अधिकतर किसान मंडियों में आढ़तियों को या फिर गाँवों में गल्ला व्यापारियों को उनके तय किए गए रेट पर बेचते हैं। हमने कई बार प्रदेश सरकार से अनाज बिक्री के लिए एक खुला बाज़ार बनाने का प्रस्ताव रखा पर अभी तक यह प्रस्ताव विचाराधीन है।’’

लंबी और असंगठित अनाज खरीद प्रणाली

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