बच्चों की सुरक्षा में ढीली न हो जाए अभिभावकों की जेब

बच्चों की सुरक्षा में ढीली न हो जाए अभिभावकों की जेबबच्चों कि सुरक्षा के मद्देनजर सीबीएससी बोर्ड ने स्कूली बसों में सीसीटीवी ,जीपीएस और गति नियंत्रक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। बच्चों कि सुरक्षा के मद्देनजर सीबीएससी बोर्ड ने स्कूली बसों में सीसीटीवी ,जीपीएस और गति नियंत्रक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं। यहाँ सवाल इस बात का है कि सीबीएससी बोर्ड द्वारा जारी ये दिशा निर्देश प्रभावी हो सकेंगे या नहीं?

ऐसी ही अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

स्कूल प्रशासन के लिए जहां बसों में इनके इंतजाम बहुत बड़ी चुनौती होंगे तो वहीं अभिभावकों के अनुसार इन पर आने वाला खर्च किसी भी तरह से बच्चों की फीस से जोड़ा जायेगा। इसका सीधा असर अभिभावकों की जेब पर होगा।

बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीबीएसई द्वारा जारी संशोधित दिशानिर्देशों के मुताबिक स्कूल बसों में अब जीपीएस, सीसीटीवी कैमरे और गति नियंत्रक होंगे। साथ ही बच्चों की सुरक्षा के लिए एक परिवहन प्रबंधक और एक प्रशिक्षित महिला अटेंडेंट को बस में होना होगा।

ऐसा हर बोर्ड की बसों के लिए लागू होना चाहिये। लेकिन अभिभावक को बस में रहने के लिए कैसे और किस आधार पर कहा जा सकता है। बस में महिला अटेंडेंट रखना भी एक बड़ी चुनौती होगी। यह बात भी सच है कि जब स्कूलों का खर्च बढ़ेगा तो इसका असर अभिभावकों की जेब पर भी पड़ना निश्चित है।
सुशील कुमार, निदेशक , लखनऊ पब्लिक स्कूल

सेंट क्लेअर्स कान्वेंट स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ने वाली बच्ची की नानी मंजू सक्सेना 75 वर्ष कहती हैं “यह अच्छी बात है कि बस में गति नियंत्रक, सीसीटीवी लग जायें लेकिन स्कूल वाले अगर कुछ भी ऐसा करते हैं तो उसका खर्च बच्चों की फीस में लगा देते हैं। इससे स्कूल पर तो खर्च का बोझ नहीं आता, हम लोगों का स्कूल का बजट बढ़ जाता है। बसों में यह सब स्कूल की ओर से किया जाये और हम लोगों पर इसका असर न पड़े तो यह वाकई अच्छी बात है।”

जारी दिशानिर्देशों के अनुसार स्कूल बस में एक अभिभावक भी होने की बात कही गयी है जो चालक व अन्य कर्मचारियों के व्यवहार पर नजर रख सके। हाल ही में उत्तर प्रदेश में हुई एक बस दुर्घटना के मद्देनजर इन दिशानिर्देशों को मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के निर्देशों पर जारी किया गया है।

सीसीटीवी, गति नियंत्रक और जीपीएस जैसी चीजें यदि बसों में लगायी जायेंगी तो अच्छी बात है लेकिन जहां तक यह कहा गया है कि एक अभिभावक को बस में चालक और कर्मचारियों पर नजर रखने के लिए बिठाया जाये। यह किसी भी अभिभावक के लिए संभव नहीं होगा। प्रशिक्षित महिला अटेंडेंट को भी बस में रहने के लिए कहा गया है लेकिन यह भी संभव नहीं हो सकेगा।
प्रदीप श्रीवास्तव, अध्यक्ष , उत्तर प्रदेश अभिभावक कल्याण संघ

‘स्कूल और अभिभावक के लिए संभव नहीं’

सेंट जोसेफ स्कूल के निदेशक अनिल अग्रवाल कहते हैं “यह बात सही है कि यदि बसों में सीसीटीवी कैमरा, जीपीएस और गति नियंत्रक लग जायेंगे तो बच्चे पहले की अपेक्षा काफी हद तक सुरक्षित रहेंगे। इसके साथ ही बस में हो रही गतिविधि और चालक पर नजर भी रखी जा सकेगी। लेकिन स्कूलों को खर्च का बोझ अभिभावकों पर पड़ना लाजमी है। महिला अटेंडेंट और अभिभावकों को बस में रखने की बात कही गयी है वह किसी भी स्कूल और अभिभावक के लिए संभव नहीं है।”

Share it
Top