वापस आएगी मूंगफली की खेती 

Deepanshu MishraDeepanshu Mishra   10 March 2017 3:46 PM GMT

वापस आएगी मूंगफली की खेती सीतापुर जनपद में मूंगफली का काफी बड़ा क्षेत्रफल है।

दीपांशु मिश्रा ,स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

सीतापुर। जनपद में मूंगफली का काफी बड़ा क्षेत्रफल हुआ करता था और वहां सारी सुविधाएं भी उपलब्ध थीं, जिससे यह खेती फलफूल रही थी पर समय के साथ-साथ मूंगफली यहां से खत्म होती गयी। कृषि विज्ञान केन्द्र, कटिया के वैज्ञानिकों द्वारा जनपद के उन इलाकों का सर्वे किया गया, जहां पर मूंगफली खूब हुआ करती थी।

सारी परिस्थितियां अनुकूल होते हुए भी मूंगफली की खेती बंद कर दी गयी। इसके साथ ही साथ जनपद के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मूंगफली अनुसंधान निदेशालय, जूनागढ़, गुजरात के निदेशक डॉ. राधाकृष्णन टी, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राम दत्ता, व्यापारियों और किसानों के साथ भी बैठक की गयी।

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सारी परिस्थितियों पर अध्य्यन करने के बाद केन्द्र द्वारा मूंगफली अनुसंधान निदेशालय, जूनागढ़, गुजरात के सहयोग से एक परियोजना के तहत फिर से मूंगफली कि खेती को वापस किसानों के बीच लाने का निर्णय लिया गया। इस क्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र ने मूंगफली अनुसंधान निदेशालय के सहयोग से मूंगफली की खेती को जायद और खरीफ दोनों सीजन में कराने की परियोजना पर काम शुरू कर दिया है।

इस परियोजना के तहत हम जायद में चयनित कृषकों के साथ 20 एकड़ क्षेत्रफल में मूंगफली का प्रदर्शन-बीज उत्पादन कार्य कर रहे है चूंकि यहां पर पहले जायद में मूंगफली की खेती की नहीं जाती थी इसलिए क्षेत्रफल कम लिया गया है। अच्छी बात यह है कि फसल कटने के बाद कृषि विज्ञान केन्द्र उनकी सारी पैदावार को खरीद भी लेगा उन्हें और कहीं नहीं बेचना है।

मूंगफली को गरीबों का काजू कहा जाता है मूंगफली के दाने मे 48-50 फीसदी वसा और 22-28 फीसदी प्रोटीन तथा 30 से 40 फीसदी तेल पाया जाता हैं। मूंगफली की खेती करने से भूमि की उर्वरता भी बढ़ती है। डॉ. आनंद सिंह , कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक

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