एक स्कूल में चल रहीं तीन स्कूलों की कक्षाएं

Meenal TingalMeenal Tingal   9 Feb 2017 12:40 PM GMT

एक स्कूल में चल रहीं तीन स्कूलों की कक्षाएंलगभग एक वर्ष पहले लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे बनते समय तीन स्कूलों को हटाया गया था।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। लगभग एक वर्ष पहले लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे बनते समय तीन स्कूलों को हटाया गया था। ऐसे में वहां के स्कूल के बच्चों को पास के स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया। आलम यह है कि स्कूल के छोटे कमरों में लगभग 100-100 बच्चों को पढ़ाई करनी पड़ रही है। यह हाल एक नहीं, बल्कि तीन स्कूलों के बच्चों का है।

जिला मुख्यालय से 35 किमी. दूर काकोरी ब्लॉक के माधवपुर में स्थित प्राथमिक विद्यालय माधवपुर और जलियामऊ में स्थित पूर्व प्राथमिक विद्यालय जलियामऊ में जब वर्ष मई 2015 में प्रदेश सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे तैयार हुआ तो दोनों स्कूलों को तोड़ना पड़ा। तब इन दोनों स्कूलों के लगभग 160 बच्चों को जलियामऊ में ही स्थित प्राथमिक विद्यालय जलियामऊ में शिफ्ट कर दिया गया। इस स्कूल में पहले से ही लगभग 105 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। हाल यह है कि स्कूल के चार कमरों में लगभग 270 बच्चों को पढ़ाने की औपचारिकता निभायी जा रही है।

प्राथमिक विद्यालय माधवपुर एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय जलियामऊ इन दोनों स्कूलों को लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे बनने के समय हटाना पड़ा था। इसके बाद इन दोनों स्कूलों को नये रूप में बनवाने के लिए फंड से सम्बन्धित प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। जैसे ही वहां से प्रस्ताव पास होता है, दोनों स्कूलों को बनवाने का काम शुरू कर दिया जायेगा।
प्रवीण मणि त्रिपाठी, बेसिक शिक्षा अधिकारी।

प्राथमिक विद्यालय जलियामऊ की इंचार्ज आरती (43 वर्ष) कहती हैं, “पहले तो स्कूल में बच्चे आराम से पढ़ाई कर लेते थे, लेकिन जब से दो और स्कूलों के बच्चे हमारे स्कूल में शिफ्ट हुए हैं, तब से बहुत दिक्कत हो रही है।” आरती आगे बताती हैं, “पहले कहा गया था कि जल्द ही नये स्कूलों को बनाने के लिए फंड आ जायेगा, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। चूंकि मेरे स्कूल में दो अन्य स्कूल शिफ्ट हुए हैं, इसलिए अब मुझे अपने यहां पढ़ने वाले 105 बच्चों को दो छोटे-छोटे कमरो में पढ़ाई करवानी पड़ रही है। बाकी दोनों स्कूलों को एक-एक कमरा दिया गया है। इस कारण एक तरफ जहां बच्चे परेशान होते हैं, वहीं हम लोगों को भी पढ़ाने में मुश्किलें आती हैं।”

प्राथमिक विद्यालय माधवपुर के बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षामित्र शिव किशोर द्विवेदी (38 वर्ष) बताते हैं, “स्कूल तोड़ने के बाद शिक्षा विभाग द्वारा कुछ समय के लिए बच्चों को प्राथमिक विद्यालय जलियामऊ में शिफ्ट करने की बात कही गयी थी।

साथ ही कहा गया था कि जल्द से जल्द बच्चों के लिए स्कूल की व्यवस्था कर दी जायेगी। अब लगभग एक वर्ष पूरा होने को है और अब तक बच्चों के लिए अलग स्कूल की व्यवस्था नहीं की गयी है। तीन स्कूलों को चार कमरों में संचालित किया जा रहा है।

बच्चों को बैठने में बहुत दिक्कत होती है।” शिव किशोर आगे बताते हैं, “इस बारे में तीनों स्कूलों के शिक्षकों के द्वारा खण्ड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से बेसिक शिक्षा अधिकारी से कई बार शिकायत की गयी, लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं हो सका है।”

एक ही कमरे में एक से कक्षा पांच तक के बच्चे

प्राथमिक विद्यालय माधवपुर में कक्षा पांच में पढ़ने वाली रोचना (12 वर्ष) कहती हैं, “कक्षा एक से लेकर कक्षा पांच तक के सभी बच्चों को एक साथ एक ही कक्षा में बैठना पड़ता है। पांचों कक्षाओं के बच्चे एक साथ बैठते हैं, इसलिए कई बार पढ़ाई समझ में नहीं आती है। सर और मैम के पास पूछने जाना पड़ता है। ठीक से बैठ नहीं पाते, बैग कमरे के बाहर रखना पड़ता है और खाना खाने में भी बहुत दिक्कत होती है।” रोचना कहती हैं, “पिछले वर्ष गर्मी के दिनों में कई बार बच्चे बेहोश भी हो चुके हैं। बारिश में भी बहुत दिक्कतें हुई थीं, जिससे अब डर लगता है।”

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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