गाँव के लोगों को डाकिये देंगे बैंकिंग की जानकारी

गाँव के लोगों को डाकिये देंगे बैंकिंग की जानकारीअब डाकिया ग्रामीणों को बताएंगे डाक बैंकिंग की सुविधाओं के बारे में।

मोहित अस्थाना

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

उन्नाव। अगर आज के दौर में इंटरनेट बैंकिंग या डाक बैंकिंग की बात की जाए तो शहरीय लोग ज्यादा हाइटेक हैं। मगर अब डाक विभाग ने ग्रामीणों को भी डाक बैंकिंग की हाईटेक सुविधाओं के बारे में जागरूक करने और उन्हें इन सुविधाओं का लाभ उठाने की जिम्मेदारी ली है। इसके लिये डाकिया गाँव के घर-घर जाकर लोगों को डाक बैंकिंग की सुविधाओं के बारे में बताएंगे।

इसके लिये डाकिये को सौर ऊर्जा से चलने वाली हैंड डिवाइस दी जायेगी। इससे डाकघर के खाताधारकों को घर बैठे ही पैसों का लेन-देन करने में आसानी रहेगी। जानकारी के मुताबिक, पहले चरण में 43 जिले के एक लाख गाँवों को शामिल किया जायेगा। इसके लिये डाक विभाग के उच्च अधिकारियों ने प्रधान डाकघर और सब डाकघरों से सूची मांगी है। रूरल आईपीपी अभियान के तहत सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है।

इंफार्मेशन एंड कम्यूनिकेशन टैक्नोलॉजी से गाँव क्षेत्र में आने वाली डाकघर शाखाओं को सीबीएस (कोर बैंकिंग सोल्यूशन) किया जायेगा, जिससे गाँव क्षेत्र में आने वाले डाकियों को पहले हाइटेक किया जा सके। अभी तक गाँव क्षेत्रों के डाक घरों में सबसे बड़ी समस्या जो सामने आई है, वो है बिजली की समस्या। लेकिन इस हैंड डिवाइस के आ जाने से आने वाले समय में इस समस्या से ग्रामीण खताधारकों को भी निजात मिल जायेगी।

गाँव में ग्रामीणों तक डाक बैंकिंग की सुविधाओं का लाभ देने के लिए हमारे पास आदेश आ चुका है। हालांकि अभी सर्कुलर नहीं मिल पाया है। इस सुविधा के शुरू होने से ग्रामीणों को काफी लाभ मिलेगा।
एसआर गुप्ता,पोस्ट मास्टर,प्रधान डाकघर (उन्नाव)

इतना ही नहीं, ग्रामीणों को शहरवासियों की तरह हाइटेक करने के लिये डाक विभाग ग्रामीणों को घर बैठे ही पेंशन, रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट, मनी आर्डर, ई-डाक आदि सुविधाएं डाकिये के माध्यम से घर बैठे मुहैया कराई जाएंगी। अधिकारियों के मुताबिक, डिवाइस को विभाग के सेंट्रल सर्वर से जोड़ा जायेगा। इतना ही नहीं, शाखा डाकपाल को मिनी कम्प्यूटर दिया जायेगा। ताकि जरूरत पड़ने पर लेन-देन का कार्य शाखा डाकपाल भी कर सके। इसके लिए डाक विभाग का आईटी सेल डाकघर कर्मिचारियों को प्रशिक्षित करेंगे।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

First Published: 2017-01-17 16:25:58.0

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