किसानों को नहीं मिल रहे आलू के खरीददार

किसानों को नहीं मिल रहे आलू के खरीददारबंपर आलू उत्पदान से रखे-रखे ही चिटक रहे आलू। 

इश्त्याक खान/रहनुमा बेगम (कम्युनिटी जर्नलिस्ट)

औरैया। बंपर उत्पदान से आलू के रेट इतने कम हो गए हैं कि खरीददार खोजे नहीं मिल रहे हैं। इस बार आलू का सही दाम न मिल पाने के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में जिले के कई गाँवों में आलू पड़े-पड़े ही चिटक रहे हैं।

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भाग्यनगर ब्लाक के गाँव दौलतपुर निवासी सुखवीर कुमार दोहरे (36 वर्ष) बताते हैं, “आलू की फसल की लागत भी नहीं निकल पाई है। स्टोर में आलू न लिए जाने से किसानों की और मुसीबत बढ़ गई है।” पिछले साल की अपेक्षा इस साल आलू की फसल 1000 हेक्टेयर में भी अधिक हुई है।

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आलू की पक्की फसल खुदाई पर कुफरी आलू वाले किसानों को भारी नुकसान हुआ है। बुवाई के समय कंपोस्ट खाद डालने के बाद तैयार फसल में फर्टिलाइजर की मात्रा अधिक हो जाने के कारण आलू चिटक गये हैं। चिटके आलू न तो बीज लायक और न ही बाजार में उनका कोई खरीददार हैं।

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अधिक उत्पादन होने के कारण भंडारण मिलों ने भी आलू लेने से इंकार कर दिया है। सही आलू का जहां किसानों को पैसा नहीं मिल पा रहा है वहीं चिटके हुए आलू का तो कोई मूल्य ही नहीं है। जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार बताते हैं, “बुवाई के समय किसान कंपोस्ट काफी मात्रा में डालते हैं और फसल तैयार होने पर फर्टिलाइजर अधिक मात्रा में डाल देते हैं। इसलिए आलू चिटक गया है। कंपोस्ट डालने के बाद किसान हल्की मात्रा में फर्टिलाइजर डालते तो आलू नहीं चिटकता।”

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