तस्करों से बचाना है तो एकांत में न बांधे पशु

तस्करों से बचाना है तो एकांत में न बांधे पशुप्रतीकात्मक फोटो

स्वयं डेस्क

पशु तस्करी की घटनाएं लगातार सुनने में आती हैं, ऐसे में किसान भाईयों को जरूरत है अपने पशुओं को सुरक्षित रखने की। अपराधी दिन में आकर दवा, जड़ी बूटी, खिलौने बेचने के बहाने एकांत व सुनसान घरों को चिन्हित कर लेते हैं और रात्रि में वाहनों से आकर पशु चुरा ले जाते हैं, साथ ही अपने साथ पत्थर और शस्त्र भी रखते हैं, जिससे कोई उनका पीछा करे तो उसे घायल कर सकें।

ऐसी घटनाओं की जानकारी तुरंत पुलिस को दें या फिर एनजीओ को दें। इसके अलावा जो पशु दूध देना बंद कर दें उन्हें भी बेचने के बजाय गोशाला में दे दें, जिससे वो कटने से बच जाए।
यतिन्द्र त्रिवेदी, सचिव, जीवाश्रय, पशुओं के हित में काम करने वाली गैर सरकारी संस्था

बरतें ये सावधानियां

  • गाँव में आने जाने रास्तों पर विशेष सतर्कता रखी जाए व विशेषकर रात में ग्राम सुरक्षा समिति का गठन कर सतर्कता रखी जाए।
  • दिन में जड़ी बूटी, दवा, खिलौना बेचने वालों की गतिविधियों पर विशेष सतर्कता रखी जाए।
  • उनके मोबाइल नम्बर व पते आदि पर पूछ कर नोट कर स्थानीय पुलिस की सहायता से सत्यापित करा लिया जाए।
  • रात में जानवरों को एकांत में न बांधे, बल्कि ऐसे स्थान पर एक साथ बांधें, जहां दीवार, बाड़ या कोई तार आदि का अवरोध हो।
  • प्रकाश की उचित व्यवस्था रखें, कुछ न हो तो आग जलाकर भी प्रकाश रखें व ग्राम सुरक्षा समिति की सक्रियता का प्रभाव नजर आए।
  • आवश्यकता की स्थिति में पत्थर, लाइसेंसी अस्लाहा आदि भी एकत्रित रखें और गाँव के बाहर जाने वाले रास्ते पर पुलिस की सहायता से नाकेबंदी भी विचार विमर्श कर रखवाएं।
  • घटना घटित होने की संभावना, शुरूआत व हो जाने की स्थिति में तत्काल सूचना 100 नंबर और स्थानीय थाना या चौकी को दें। संभव हो तो अपराधियों और गाड़ी का हुलिया व नंबर भी तत्काल सूचित करें।
  • ग्राम प्रधान, हल्का पुलिस प्रभारी और ग्राम चौकीदार की भी सहायता लेकर अच्छी व्यूह रचना स्थापति करें।

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